डीजीएमएस का 121वां स्थापना दिवस मना:आनेवाला समय हाइड्रोजन एनर्जी का है, खदानों से इसके उत्पादन में कोई दिक्कत नहीं होगी: आईआईटी निदेशक

धनबाद13 दिन पहले
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  • आईआईटी आईएसएम के निदेशक डॉ. राजीव शेखर थे मुख्य अतिथि, डीजीएमएस डीजी ने कहा हम तकनीकी सहयोग आईआईटी आईएसएम से लेंगे

समय के साथ हमारी एनर्जी की जरूरतें बढ़ती जा रही हैं। एनर्जी पाेर्टफाेलियाे में रिन्यूवल (साेलर एवं विंड) की भागीदारी 25 से 30 प्रतिशत तक हो गई है। बावजूद इसके कोयला अगले 20 से 30 साल तक रहेगा। मेटल माइंस तो बिल्कुल रहेगा। यह कहना है आईआईटी आईएसएम के डायरेक्टर डॉ. प्रोफेसर राजीव शेखर का। वे शुक्रवार को खान सुरक्षा महानिदेशालय के 121वें स्थापना दिवस समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

शेखर ने कहा कि माइनिंग क्षेत्र में धीरे-धीरे सरकारी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। पब्लिक सेक्टर कंपनी सरकारी टार्गेट को पूरा करेगी। सालाना 200 मिलियन टन कोयले के आयात को कैसे कम किया जाएगा। ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में सॉफ्टवेयर का अहम रोल है।

काेल इंडिया ने आईएसएम को दिया 10 कराेड़

निदेशक राजीव शेखर ने बताया कि माइनिंग की समस्या को दूर करने के लिए नई तकनीक विकसित करने के लिए आईएसएम के इनोवेशन हब टेक्समिन को कोल इंडिया ने 10 करोड़ रुपया दिया है। इससे इनोवेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां छाेटी-छाेटी कंपनियां माइनिंग की समस्या को दूर करने के लिए नए तकनीक विकसित करेंगी।

इसके अलावा दसाउट सिस्टम कंपनी ने दो सौ करोड़ रुपए का सॉफ्टवेयर दिया है। वे हार्डवेयर और ड्रोन भी दे रहे हैं, जिसकी मदद से माइनिंग के क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाला समय हाइड्रोजन एनर्जी का है। इसके लिए हमें पहले से तैयार होना पड़ेगा। खदानों से हाइड्रोजन गैस का उत्खनन करने में सुरक्षा का कोई इशू नहीं रहेगा।

खान दुर्घटनाओं में कमी हुई है : डीजी डीजीएमएस

पिछले 100 साल में खान दुर्घटनाओं में 10 गुना कमी हुई है। पिछले साल कोल सेक्टर में एक्सीडेंट का रेशियो 0.20 था, जो घट कर 0.16 रह गया है। यह कहना है डीजीएमएस के महानिदेशक प्रभात कुमार का। उन्होंने स्थापना दिवस समारोह के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह कमी पर्याप्त नहीं है। इस पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि जिस रेशियो में एक्सीडेंट कम हो रहे थे उसमें कमी आ गई है। इसके लिए हमें तकनीक की जरूरत हाेगी। इसमें हम आईआईटी आईएसएम का भी सहयोग लेंगे। माइनिंग में विश्व के ऐसे विकसित देश जो माइनिंग में आगे हैं उनसे हम सहयोग लेने पर विचार कर रहे हैं।

माइंस वाले खुद बनाएंगे रेगुलेशन

डीजी ने कहा कि माइनिंग इंडस्ट्रीज बदलाव के दौर से गुजर रहा है। काफी कुछ बदलाव हुआ है। आने वाले समय में माइंस चलाने वाले कुछ रेगुलेशन बनाएंगे। इसमें सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान का अहम रोल हाेगा। सेल्फ रेगुलेशन बनाने वाले उसी को फॉलो करेंगे। डीजीएमएस का भी रेगुलेशन रहेगा। सेल्फ रेगुलेशन के लागू हो जाने से डीजीएमएस को राहत मिलेगी। इसमें चार से पांच साल का समय लग सकता है। कार्यक्रम में डीडीजी मैकेनिकल डीबी नायक, डीएमएस पीके टुंडू समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

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