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सबसे बड़े पुनर्वास का सच:बसने से पहले खंडहर हुए बेलगड़िया के क्वार्टर, खिड़की व दरवाजा ले गए चोर

धनबादएक महीने पहले
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  • जानिए, क्यों बदहाल हुए बेलगड़िया आवासीय काॅलाेनी के ये क्वार्टर

खिड़की... गायब। दरवाजा... गायब। नल... गायब। बिजली का बोर्ड... गायब। वायरिंग... उखड़ा हुआ। यह हाल बेलगड़िया के उन क्वार्टरों का है, जिनमें 2008 लोगों का पुनार्वास होना है। बसने से पहले ही यहां के क्वार्टर खंडहर में तब्दील हाे गए हैं। कराेड़ाें रुपए खर्च करने के बाद भी इन घराें का काेई उपयाेगिता नहीं है। आवारा जानवर और असामाजिक व्यक्तियाें का बसेरा हाे गया है। सबसे बदहाल स्थिति फेज-2 के क्वार्टराें का है। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने फेज-2 के क्वार्टरों को जेआरडीए (झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार) काे हैंड ओवर कर दिया है।

एक-दाे क्वार्टर काे छाेड़ कर अधिकतर क्वार्टर खंडहर दिख रहे हैं। घर का दरवाजा और खिड़की गायब है। चोरों ने यहां न तो बिजली का बाेर्ड छोड़ा है और न ही पानी का नल...। सबकुछ उखाड़ कर ले गए हैं। फेज-3, जिसमें दाे हजार क्वार्टर बने हुए हैं, उन क्वार्टराें का भी कमाेवेश यही स्थिति है। जेआरडीए के प्रबंध निर्देशक सह उपायुक्त के निर्देश पर अग्नि व भू-धंसान प्रभावित 2008 लाेगाें काे बसाया जाना है। इनमें लाेदना क्षेत्र से 636, बस्ताकाेला के 703, पुटकी-बलिहारी के 441, ईस्ट झरिया के 199 सहित अन्य जगहाें के लाेग शामिल हैं। 

हैंडओवर लिया, पर रख-रखाव नहीं किया

बेलगड़िया आवासीय काॅलाेनी फेज-2 में दाे हजार क्वार्टर हैं। वर्ष 2017 में ही ये क्वार्टर जेआरडीए काे हैंड ओवर कर दिया गया। जेआरडीए द्वारा इन क्वार्टराें का रख-रखाव नहीं किया गया। जिसके ये क्वार्टर खंडहर होते गए।

एलाॅटमेंट के बाद भी लाेगाें काे नहीं बसाया

जेआरडीए ने ये सभी क्वार्टर 2017-18 में ही एलाॅट कर दिया था। पर एलॉट क्वार्टरों में लोग शिफ्ट हो, यह सुनिश्चित नहीं किया। जेआरडीए का कहना है कि एलॉटमेंट के बाद भी लाेग इन क्वार्टरों में नहीं आए। जिसके कारण यह स्थिति हुई।

इतनी बड़ी आवासीय काॅलाेनी में सुरक्षा नहीं

बेलगड़िया भू-धंसान प्रभावित लाेगाें के बसाने के लिए धनबाद का सबसे बड़ा आवासीय काॅलाेनी है। इसके बाद भी सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। साइट पर 5-6 चाैकीदार हैं। अपराधी आते हैं व मारपीट कर समान ले जाते हैं।

बिना खिड़की व दरवाजा वाले क्वार्टर में रहेंगे कैसे

जिन क्वार्टरों में 2008 लोगों को तत्काल पुनर्वास कराना है, वह फिलहाल रहने लायक नहीं है। घरों में न दरवाजे हैं और न ही खिड़कियां। कई घरों में बिजली के बोर्ड भी गायब हैं। पानी का नल भी चोरों ने नहीं छोड़ा है। ऐसी स्थिति में सवाल यह है कि कराेड़ाें रुपए खर्च कर बनाए गए इन बदहाल क्वार्टरों कोई रहेगा कैसे?

फिनिशिंग के बाद ही लाेगाें काे उनमें बसाया जाएगा: उपायुक्त

उपायुक्त अमित कुमार का कहना है कि जेआरडीए प्रबंधन और कंस्ट्रक्शन कंपनी काे फेज-3 के सभी क्वार्टराें काे फिनिशिंग के लिए कहा गया है। एक सप्ताह के अंदर सभी क्वार्टराें काे फाइनल कर हैंड ओवर करने काे कहा गया है। अग्नि और भू-धंसान प्रभावित 2008 परिवाराें काे शीघ्र बसाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए जाएंगे। रांची मुख्यालय को वहां पुलिस चौकी स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन प्रस्ताव भेजेगा।

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