अच्छी खबर:धनसार के तुषार ने बगैर मिट्‌टी उगाई फसल, अब 10 लाख स्क्वायर फीट में खेती

धनबाद2 महीने पहले
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धनसार के तुषार । - Dainik Bhaskar
धनसार के तुषार ।

धनसार के तुषार अग्रवाल की हाइड्राेपाेनिक फार्मिंग आज 8 राज्याें के 20 शहराें तक फैल चुकी है। देशभर में इसके 100 से अधिक छाेटे सेटअप चेन्नई से गंगटाेक और गुजरात से पंजाब तक लग चुके हैं। पिछले एक वर्ष में 10 लाख स्क्वायर फीट से अधिक में बिना मिट्टी की खेती कर रहे हैं। काेराेनाकाल के दौरान उन्होंने अपना यह स्टार्टअप शुरू किया था। पहले खुद फार्मिंग की और फिर दूसराें के लिए भी हाइड्रोपोनिक सिस्टम डेवलप करना शुरू किया। 30 लाख रुपए से शुरू किए गए उनके इस स्टार्टअप का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपए हाे चुका है। खास बात है कि उनके इस फार्मिंग से उपजी हुई फसल ऑर्गेनिक से बेहतर हाेती है, जाे अंतिम ग्राहक तक काे खूब पसंद आती है। तुषार का परिवार धनसार में रहता है। उनकी स्कूलिंग दिल्ली पब्लिक स्कूल, धनबाद में हुई। पिता अनिल अग्रवाल व्यवसायी और मां बबीता अग्रवाल गृहिणी हैं।

डीपीएस से स्कूलिंग, एमबीए के दाैरान आया खेती का ख्याल

तुषार बताते हैं-जब अहमदाबाद में एमबीए कर रहा था, तब हाइड्राेपाेनिक फार्मिंग का ख्याल अाया। उस दाैरान किसानों से भी उनका मिलना होता रहा। उन्हें हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में दिलचस्पी बढ़ी। पहले स्टडी और रिसर्च शुरू किया और फिर कई किसानों और कंपनियों से जानकारी जुटाई। वर्ष 2020 में दोस्तों के साथ मिलकर राइज हाइड्रोपोनिक्स नाम से स्टार्टअप शुरू किया। इससे पहले अहमदाबाद में ही डिजिटल मार्केटिंग कंपनी डिजी एलिफेंट शुरू की, जाे अब भी काम कर रही है। इसमें किसी भी कंपनी की मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पीआर का काम करते थे।

भविष्य में झारखंड में भी हाइड्रोपोनिक फार्मिंग की योजना बना रहे तुषार

तुषार बताते हैं कि लखनऊ, गुड़गांव, दिल्ली, उत्तराखंड में देहरादून व नैनीताल, गुजरात में कई शहराें, मुंबई, हैदराबाद में हाइड्राेपाेनिक फार्मिंग का सिस्टम लगा चुके हैं। इंदाैर में भी काम चल रहा है। भविष्य में झारखंड में भी कुछ बेहतर करने की साेच रहे हैं। इस स्टार्टअप में उनके पार्टनराें में विवेक शुक्ला और मीत पटेल भी हैं। कंपनी अपने ग्राहकाें काे फार्म बना कर देती है। उन्हें पाॅली हाउस, हाइड्राेपाेनिक सेटअप, आईओटी ऑटाेमेशन लगाकर दिए जाते हैं। एक छाेटे सेटअप की कीमत 10-12 हजार रुपए पड़ती है।

जैसी दिक्कतें महसूस हुईं... वैसा ही शुरू किया स्टार्टअप

तुषार बताते हैं कि जीवन में जाे भी चीजें सामने आईं, जाे भी दिक्कतें हुईं, उसी का स्टार्टअप करता गया। 11-12वीं में साइंस के फाॅर्मूले याद नहीं हाेते थे, जब पास कर गया ताे लगा कि काेई एक ही जगह सभी फाॅर्मूले हाेने चाहिए। फिर बेंगलुरु में 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए एंड्राेइड एप्लीकेशन बनाया, जिसमें साइंस और मैथ के फाॅर्मूले थे। काॅलेज स्टूडेंट्स काे इवेंट में पार्ट टाइम जाॅब उपलब्ध कराने का भी स्टार्टअप शुरू किया था।

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