ओमिक्रॉन नया खतरा:अपने पास सिर्फ 1495 बेड, हर रोज 100 कोविड मरीज मिले तो मात्र 11 दिन में ही सभी भर जाएंगे

धनबाद2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • तीसरी लहर से निबटने की धनबाद की तैयारी कैसी...? बता रहे हैं आईएमए सचिव डॉ सुशील कुमार

भारत में कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्राॅन दस्तक दे चुका है। इस कारण देश में तीसरी लहर की आशंका भी जताई जाने लगी है। इसको देखते हुए धनबाद में भी कोविड से निबटने की तैयारी भी तेज कर दी गई है। हालांकि यह इंतजाम नाकाफी हो सकती है। धनबाद में मरीजों के लिए 30 सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में केवल 1495 कोविड बेड हैं। तीसरी लहर की स्थिति में कोविड मरीजों के लिए बेड समेत ऑक्जीजन व मैनपावर की क्या स्थिति है, इसके लिए भास्कर ने आईएमए सचिव डॉ सुशील कुमार से हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट कराया।

  • सरकारी स्तर पर सदर अस्पताल और कैथलैब कोविड सेंटर में ही है पीआईसीयू बेड

इन्फ्रास्ट्रक्टर,सिर्फ 100 बेड बढ़े, बच्चों के 50 पीआईसीयू बेड ही तैयार

डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित एक व्यक्ति 10 काे संक्रमित कर रहा था, वहां ओमिक्राॅन 35 लाेगाें काे संक्रमित कर रहा है। धनबाद की आबादी लगभग 30 लाख है। ऐसे में यदि लाेग ओमिक्राॅन से संक्रमित हाेते हैं ताे डेढ़ हजार काेविड बेड नाकाफी होंगे। इसके लिए तत्काल कम से कम तीन गुना अधिक बेड का इंतजाम किया जाना चाहिए। तीसरी लहर में अधिक संख्या में बच्चाें के संक्रमित हाेने की आशंका से इनकार नहीं है। ऐसे में जिले में 50 पीआईसीयू बेड निम्न स्तर की तैयारी है। जिले में पंचायत स्तर पर आइसाेलेशन सेंटर व ऑक्सीजन सपाेर्टेड बेड की व्यवस्था होनी चाहिए।

ऑक्सीजन,सदर व कैथलैब में ऑक्सीजन प्लांट, निजी अस्पतालों में नहीं

संक्रमण के सेकेंड वेब में अधिकतर मरीजाें काे ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। भारी किल्लत का भी सामना करना पड़ा। इसके बाद एसएनएमएमसीएच और सदर अस्पताल में दाे-दाे ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए, लेकिन शहर के दूसरे अस्पतालाें में अब तक ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगा है। सेंट्रल अस्पताल में पैसा नहीं मिलने के कारण ठेकेदार ने पीएसए प्लांट की आपूर्ति ही रोक दी है। यही नहीं, यदि जिले का ग्रामीण क्षेत्र संक्रमण की चपेट में आता है ताे वहां मरीजाें काे ऑक्सीजन कहां से मिलेगी? मात्र चार ऑक्सीजन प्लांट इतनी बड़ी आबादी काे पर्याप्त नहीं है।

मैनपावर, डॉक्टर कम, पारा मेडिकल कर्मियों को भी हटाया गया

आउटसाेर्स के माध्यम से पारा मेडिकल स्टाफ बहाल किए गए, लेकिन अब अधिकतर कर्मचारियाें काे हटाया जा चुका है। जाे कर्मचारी काम कर रहे हैं, उन्हें पांच माह से वेतन नहीं मिला है। वहीं डाॅक्टराें की कमी हुई ताे प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डाॅक्टराें काे काेविड ड्यूटी पर लगाया गया। इन्हें भी अब तक भुगतान नहीं किया गया। हाल के दिनाें में डीएमएफटी से 55 डाॅक्टराें की नियुक्ति का प्रयास किया गया लेकिन 26 ने ही ज्वाइन किया। इस स्थिति में यदि कोरोना की थर्ड वेव आती है ताे निश्चित रूप से डाॅक्टर और कर्मचारियाें की कमी हाेगी।

बरती जा रही सतर्कता कर लेंगे इंतजाम:सीएस

डाॅ श्याम किशाेर कांत का कहना है कि कई देशाें में काेराेना वायरस का नया वैरिएंट ओमीक्राॅन पाया गया है। इससे बचाव के लिए जिले में पूरी सतर्कता बरती जा रही है। बाहर से आने वाले लाेगाें की जांच कराई जा रही है। जिले के विभिन्न क्षेत्राें में काेविड 19 जांच अभियान भी जारी है। लगभग डेढ़ काेविड बेड के साथ ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की व्यवस्था है। इस बाबत सरकार और विभाग से जैसा निर्देश प्राप्त हाेगा, उसी आधार पर आगे की तैयारी के लिए भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है।

खबरें और भी हैं...