दुमका की बेटी को चाहिए इंसाफ:दुमका में बांग्लादेशी संगठन सक्रिय, लड़कियों को झांसे में ले एजेंडे के तहत बदला जा रहा धर्म

दुमकाएक महीने पहलेलेखक: दुष्यंत कुमार
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अधिवक्ताओं का फैसला- हत्या आरोपियों का नहीं लड़ेंगे केस, 3 सितंबर को बेटी को श्रद्धांजलि देंगे। - Dainik Bhaskar
अधिवक्ताओं का फैसला- हत्या आरोपियों का नहीं लड़ेंगे केस, 3 सितंबर को बेटी को श्रद्धांजलि देंगे।

दुमका में पुलिस नाबालिग हत्याकांड के आरोपियों के प्रतिबंधित बांग्लादेशी संगठन अंसार उल बांग्ला से संबंध होने का संदेह है। पुलिस ने दाेनाें आरोपियों काे 72 घंटे की रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस ने बताया कि नईम के मोबाइल रिकार्ड से जानकारी मिली कि वह अंसार उल बांग्ला से प्रभावित है। मोबाइल पर संगठन के गतिविधियों को देखता था।

यह संगठन गैर मुस्लिम लड़कियों से शादी कर उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करने के उद्देश्य से काम करता है। इस संगठन से जुड़े लोग सरहदी क्षेत्र में सक्रिय हैं। गुरुवार को भास्कर की पड़ताल में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। दुमका में एक नाबालिग को जिंदा जलाकर मार देने की घटना के बाद दुमका के डंगालपाड़ा, सानीडंगाल, जरुवाडीह और बंदरजोड़ी में कई ऐसी लड़कियां मिलीं, जिनकी सिसकियां सुनने वाला कोई नहीं है। इन लड़कियों को पहचान बदलकर प्यार की जाल में फांसा गया। फिर, निकाह कर धर्मांतरण कराया गया है। ऐसी स्थिति पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज और जामताड़ा में भी है।

2 केस से समझिए

केस- 1 - शादी के अलावा कोई विकल्प नहीं था - दुमका की सानी डंगाल मोहल्ला की रहने वाली एक युवती ने कहा कि पहले हम दोनों में प्यार हुआ। बाद में पता चला कि वह मेरे धर्म का नहीं है। मेरे पास शादी के अलावा कोई चारा नहीं था। शादी के बाद धर्म परिवर्तन करना पड़ा। शादी के 10 साल बीत चुके हैं। बच्चे भी स्कूल जाने लगे हैं।

केस- 2 - बेटी को सच्चाई पता लगी, तब तक देर हो चुकी थी- दुमका गांधी मैदान के निकट रहने वाली एक युवती के पिता ने कहा कि आठ साल पहले मेरी बेटी हम सबको छोड़कर चली गई थी। उसे जब सच्चाई का पता चला, तब तक देर हाे चुकी थी। ऐसी ही घटनाएं बंदरजोड़ी मोहल्ले में भी हुई हैं, लेकिन लोकलाज के कारण सबकी जुबां खामोश हैं।

इधर, अधिवक्ताओं का फैसला- हत्या आरोपियों का नहीं लड़ेंगे केस, 3 सितंबर को बेटी को देंगे श्रद्धांजलि

दुमका जिला अधिवक्ता संघ ने अपनी बेटी की हत्या की निंदा करते हुए दाेनाें आरोपियाें का केस नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। अध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने कहा कि संघ ने निर्णय लिया है कि आरोपियों का केस नहीं लेड़ेंगे। 3 सितंबर को दाेपहर 3 बजे शोक सभा कर दुमका की बेटी को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

गृह विभाग कर चुका है बांग्लादेशी कनेक्शन की पुष्टि

झारखंड गृह विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, साहिबगंज व पाकुड़ में चिह्नित अवैध प्रवासियों ने वोटर आईडी, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रखा है। इन इलाकों में जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश और पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया व अंसार उल बांग्ला जैसे प्रतिबंधित संगठन की पकड़ बढ़ रही है। साहिबगंज, पाकुड़, धनबाद समेत अन्य जिलों में जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश के आतंकियों की गतिविधि रही हैं। इन इलाकों में तेजी से जनसांख्यिकी भी बदलने के पुख्ता संकेत मिले हैं।

गैंग बनाकर कम उम्र की लड़कियों को किया जा रहा टारगेट

दुमका की अधिवक्ता प्रिया दत्ता सिंह ने कहा कि दुमका में एक संगठित गैंग काम रहा है। यह नाबालिग लड़कियों को प्रेम जाल में फांस कर इन पर शादी व धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा है। दुमका के डंगालपाड़ा, दुधानी, बंदरजोड़ी और जरुवाडीहा में यह ज्यादा प्रभावी है। उच्चस्तरीय जांच हो तो चौंकाने वाला परिणाम सामने आ सकता है।