भास्कर खास:मनरेगा योजना में 155 करोड़ रुपए सालभर में निकाले गए, सबसे ज्यादा रंका में 22 करोड़

गढ़वा8 महीने पहलेलेखक: लव कुमार दूबे
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गढ़वा, मनरेगा योजना की तस्वीर  । - Dainik Bhaskar
गढ़वा, मनरेगा योजना की तस्वीर ।

मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में वेंडर का अहम रोल माना जाता है। क्योंकि इसमें वेंडर के खाते से ही योजना की राशि का भुगतान किया जाता है। प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों व कर्मियों की निगरानी में राशि का निकासी होती है। ली गई योजनाओं के लाभुकों को बाउचर के माध्यम से विभिन्न सामग्रियों का भुगतान होता है। जिसमें बाउचर का खेल होता है।

मनरेगा योजना क्रियान्वयन से संबंधित ऑन लाईन एंट्री भी की जाती है। जिसमें सामग्री का भुगतान, योजना, मजदूरी आदि अंकित रहता है। वहीं वेंडर का विवरण भी मौजूद रहता है। इसमें जिला स्तर पर गहनता से जांच होने पर कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

वहीं बाउचर का खेल का पत्ता भी खुलने लगेगा। मगर निगरानी समिति की अनदेखी के कारण मामले सामने नहीं आ पाते हैं। जिसका खामियाजा लाभुकों और मजदूरों को भुगतना पड़ता है। ऑनलाइन अंकित किए गए गढ़वा जिले के पोर्टल से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में 316 वेंडर निबंधित हैं।

दिलचस्प यह कि जिला प्रशासन भी कुछ गिने-चुने वेंडरों पर ही मेहरबान है। तभी तो कुछ ही वेंडरों के खाते में मोटी रकम भेजी जाती है। जहां से प्रखंड स्तर पर राशि को योजनाओं में सामग्रियों के भुगतान के लिए अंकित किया जाता है।

रंका प्रखंड के वेंडरों के खाते के माध्यम से 22 करोड़ 50 लाख रुपए की निकासी

मनरेगा के योजना में जिले के विभिन्न निबंधित वेंडरों के माध्यम से वर्ष 2021-22 में एक अरब 55 लाख रुपये की निकासी हुई है। जिसमें सर्वाधिक राशि रंका प्रखंड के वेंडरों के खाते के माध्यम से 22 करोड़ 50 लाख रुपये, मेराल प्रखंड में 12 करोड़ 15 लाख रुपये, खरौंधी प्रखंड में 11 करोड़ 72 लाख रुपये, डंडई प्रखंड में नौ करोड़ 96 लाख रुपये और चिनियां प्रखंड में छह करोड़ 67 लाख रुपये मनरेगा की विभिन्न योजनाओं के निर्माण को लेकर निकासी की गई है। योजनाओं में पत्थर, बालू, छरी, छड़, सीमेंट आदि सामग्री का बाउचर भी वेंडरों के माध्यम से ही लगाकर भुगतान किया जाता है।

गढ़वा जिले में मनरेगा एक्ट का खुलेआम हो रहा है उल्लंघन

जिले में मनरेगा योजना लंबित रहने और लाभुकों को भुगतान से संबंधित लगातार शिकायत अधिकारियों को मिलती है। मगर इस मामले में कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन द्वारा खासा रूचि नहीं दिखाई पड़ता है। कईं ऐसे मामले सामने आए हैं। जिनमें प्रखंडस्तर के पदाधिकारियों व कर्मियों की मिलीभगत से योजना पूर्ण किए बगैर ही राशि की निकासी कर ली गई है।

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