आंधी-तूफान व हल्की बारिश:मौत ने ग्रामीणों को खींच लाई वापस गांव ईंट भट्‌ठे में अन्य जगहों पर करते थे काम

गढ़वाएक महीने पहले
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रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे आंधी-तूफान व हल्की बारिश ने जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में तबाही मचा दिया। जान-माल की काफी नुकसान हुआ है। सदर प्रखंड के महुलिया गांव के बरवाही टोल में घटी घटना में तीन मजदूरों की मौत के बाद मातम छा गया।

मृतक गांव के खखनु बांध के निकट स्थित एक गड्ढे में जमा पानी में मछली मारने के लिए गए हुए थे। इसी दौरान आंधी-तूफान व बारिश शुरू हो गई। जिससे बचने के लिए ग्रामीण बांध के किनारे स्थित एक विशाल बांस के पेड़ के नीचे छिप गए।

मगर तेज आंधी में अचानक बांस का पेड़ जड़ सहित पलट गया। जिससे दबने से तीनों ग्रामीणों की मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों में राजेंद्र भुइयां (55 वर्ष), उनका चचेरा भाई मनीजर भुईंया (46 वर्ष), इनका ममेरा भाई फेकन भुईंया (57 वर्ष) शामिल हैं।

तीनों ईंट भट्ठा में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। 120 की आबादी वाले बरवाही टोले पर हरिजन व भुईंया परिवार के लोग रहते हैं। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बूरा हाल हो गया। घटना स्थल पर धीरे-धीरे आसपास के गांव के सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई।

घटना के बाद सूचना पाकर मौके पर पहुंचे सदर इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार व एएसआई अभिमन्यु सिंह बांस के नीचे दबे शव को निकालने में जुट गए। दोपहर व आंधी-तूफान के कारण घटना स्थल पर कोई भी ग्रामीण मौजूद नहीं थे। सिर्फ मरने वाले ही तीनों ग्रामीण थे। जो एक साथ बांस के पेड़ के नीचे छिपे हुए थे। जिन्हें भागने का भी मौका नहीं मिला।

बांस के पेड़ के नीचे दबे ग्रामीण पानी मांग रहे थे व बचाओं बचाओ चिल्ला रहे थे : प्रत्यक्षदर्शियों में गांव की महिला संगीता देवी ने कहा कि आंधी-तूफान के बाद गांव के बच्चे लकड़ी का टुकड़ा चुनने के लिए बांध के नजदीक पहुंचे थे।

बच्चों ने ही बांस के पेड़ को गिरा देखा और नीचे से ग्रामीणों की चिल्लाने की आवाज सुनी। इसके बाद बच्चे डर से वहां भागकर गांव में हल्ला किए।

संगीता देवी ने कहा कि एक व्यक्ति जान बचाओ हो भईया चिल्ला रहे थे तो दूसरा व्यक्ति पानी मांग रहे थे। महिला ने कहा वह पानी लेकर जैसे ही पहुंची तब तक सन्नाटा हो चुका था और ग्रामीणों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। इसके बाद लोगों ने जिला प्रशासन को सूचना दिया।

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