पेयजल का है इंतजार:सांसद के गोद लेने के 7 साल के बाद भी नहीं बनी सड़क,स्थिति जस की तस

गढ़वा2 महीने पहलेलेखक: ​सोनू कुमार​​​​​​​
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गांव में सड़क की जर्जर स्थिति। - Dainik Bhaskar
गांव में सड़क की जर्जर स्थिति।

सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित गढ़वा जिला के मध्या पंचायत गांव किसी भी मायने में आदर्श नहीं बन पाया। चार वर्ष बाद भी इस गांव को जाने के लिए मुख्य सड़क नहीं बन पाई। हिचकोले खा कर गांव तक जाना पड़ता है। साथ ही यहां पर पानी की व्यवस्था नहीं हो पायी। पीने के लिए भी पानी एक से डेढ़ किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है।

सांसद बीडी राम ने वर्ष 2015 में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत मध्या पंचायत को गोद लिया था। शुरू में इस योजना को लेकर काफी उत्साह था। मध्या गांव के लोगों को उम्मीद थी कि अब यहां की समस्याएं दूर हो जायेंगी।

जलमीनार से पानी नहीं मिलने से छह हजार की आबादी चापानल के भरोसे, बरसात में बच्चों का स्कूल जाना भी होता है मुश्किल

ग्राग्रामीणों के अनुसार मुख्य सड़क नहीं बनने के कारण भारी परेशानी हो रही है। सड़क नही रहने की वजह से वाहन से आने जाने में काफी समस्या होती है। बरसात में पैदल चलना भी मुश्किल होता है। खासकर माध्यमिक व उच्च विद्यालय के छात्रों को बारिश के समय हाथ में जूता, चप्पल ले कर स्कूल जाना पड़ता है। दुपहिया वाहन के भी फिसलने का डर रहता है। हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

आदर्श पंचायत मध्या गांव की आबादी लगभग 6 हजार है। यहां पर पेयजल की व्यवस्था गांव के अंतिम छोर पर है। चापानल तो है। लेकिन दिखावे में जहा भी चापाकल है। जो काफी दिनों से खराब है। कई सोलर टंकी है, जिसका नल चोरों ने उखाड़ लिया है। तो कही काफी दिनों से खराब पड़ा है।

वहीं एक तालाब व नदियों भी है। जहां लोग नहाते हैं। सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित होने के बाद गांव में पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछायी गयी। लेकिन, आज तक यहां हर घर नल, हर घर जल योजना के तहत लोगों को पानी नहीं मिल पाया।

ग्रामीण बोले- सांसद के गोद लेने से बहुत खुशी हुई थी. लेकिन सिर्फ कागजी रूप से गांव का विकास हुआ

आदर्श पंचायत बने मध्या गांव के ग्रामीण जवाहर चौ धरी, शिव पूजन चौधरी, सकुंतला देवी, प्राण कुंवर, सुनील चौबे ने कहा की सांसद के गोद लेने के बाद भी आज गांव की स्थिति वही का वही रह गया। यहां पहले भी गांव में पानी, बिजली, सड़क की समस्या थी आज भी हम सभी ग्रामीण उसी दस को झेल रहे है। लाखो रुपए की लागत से लगे आरो प्लांट हाथी की दात साबित हो रहा है। आदर्श पंचायत घोषित होने के बाद सभी ग्रामीण को बहुत खुशी हुई थी। लेकिन सिर्फ कागजी रूप से गांव का विकास हुआ।

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