प्रशासन ने पुलिस पिकेट बनवाया:उवि में बना दिया गया पुलिस पिकेट, बच्चाें की नहीं हाेती है यहां पढ़ाई

देवरी2 महीने पहलेलेखक: रामजी कुमार
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धरपहरी उच्च विद्यालय जो पुलिस पिकेट में तब्दील। - Dainik Bhaskar
धरपहरी उच्च विद्यालय जो पुलिस पिकेट में तब्दील।

देवरी प्रखण्ड के सुदूरवर्ती अति उग्रवाद प्रभावित पंचायत गुनियाथर के धरपहरी गांव में लाखों की लागत से बना उच्च विद्यालय शिक्षक नियुक्ति के अभाव में वर्तमान समय में पुलिस का बसेरा बना हुआ। विद्यालय संचालन नही होने के वजह से इलाके के छात्र-छात्राएं 16 किलोमीटर दूर जाकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए विवश है। जिससे शिक्षा विभाग की उदासीनता साफ झलक रही है।

बताते चले कि वर्ष 2014-15 में उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नही जाने पड़े जिसके लिए लाखों खर्च से देवरी के अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बरमसिया व उत्क्रमित मध्य विद्यालय धरपहरी को शिक्षा विभाग में अपग्रेड कर उच्च विद्यालय का दर्जा देकर लाखों खर्च दो मंजिला भवन बनाया।

पूरे तामझाम से दोनों विद्यालय के का जमुआ विधायक ने उद्घाटन भी किया। उद्घाटन के बाद बरमसिया उच्च विद्यालय में शिक्षा विभाग ने शिक्षक की नियुक्ति कर पठन पाठन कार्य प्रारम्भ कर दिया। उस विद्यालय से दसवीं के छात्र-छात्राओं ने मैट्रिक परीक्षा में फॉर्म भर कर परीक्षा दी और उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया।

वहीं इसी सत्र में इसी थाना क्षेत्र के अति उग्रवाद क्षेत्र जहां पर प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादियो की दिन में जनता दरबार लगती थी उस जगह पर उच्च विद्यालय के लिए दो मंजिला भवन बना कर क्षेत्र के छात्र-छात्राओं शिक्षा के प्रति जितना हौसला बुलंद करवाया। उतना ही हौसला विद्यालय संचालन नही होने से कम हो गया। लम्बे अंतराल के बावजूद विद्यालय संचालन नही होने के बाद निवर्तमान पुलिस कप्तान सुरेंद्र झा ने क्षेत्र में नक्सलियों की लगातार चहल कदमी को देखते हुए यहो पिकेट बना दिया था।

मुखिया ने कहा- विभाग इस मामले में दे ध्यान
इस बाबत मुखिया सैरुन खातून ने बताया कि विद्यालय अपग्रेट होने से इस इलाके के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अभिभावकों को उम्मीद जगी थी कि अब अपने बच्चों पढ़ने के लिए दूर भेजना नही पड़ेगा। विशेष करके इस इलाके के छात्राओं को जो आठवीं की परीक्षा के बाद आगे पढ़ने की इच्छा के बावजूद घर मे चौका बर्तन करने पर मजबूर हो जाती है। लेकिन शिक्षा विभाग की उदासीनता का शिकार इलाके के छात्रा हो रही है वहीं ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से उच्च विद्यालय को संचालन करने की मांग की।

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