जांच रिपोर्ट:रिपोर्ट में खुलासा, सभी 3 जलमीनार योजना में की गई थी फर्जी निकासी

गुमला6 दिन पहले
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स्थल की जांच करते अधिकारी। - Dainik Bhaskar
स्थल की जांच करते अधिकारी।

चैनपुर प्रखंड के रामपुर पंचायत में 14वीं और 15वीं वित्त योजना के अंतर्गत जलमीनार निर्माण में हुए घोटाले की जांच पूरी हो गई। एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सुनील कुमार खाखा द्वारा जांच रिपोर्ट डीसी सुशांत गौरव को सौंप दिया गया। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 3 जलमीनार योजना की जांच की गई जिसमें गड़बड़ी मिली है। 7 लाख 89 हजार 223 रुपए की निकासी कर ली गई। प्रखंड के झाड़गाव, रामपुर खास व भठौली गांव में वेंडर, तत्कालीन मुखिया व तत्कालीन पंचायत सेवक द्वारा मिलीभगत कर फर्जी तरीके से पैसे की निकासी कर ली गई।

भठौली गांव में पुरानी योजना को 15वीं वित्त योजना में रिकॉर्ड खोलकर 3 लाख 84 हजार 261 रु की फर्जी निकासी कर ली गई है। वहीं भगत बुकमा स्कूल में काम किए बगैर इस्टीमेट बनाकर 2 लाख 49 हजार 800 रु की फर्जी तरीके से निकासी कर ली गई है।

वहीं भटौली गांव में जल मीनार योजना इस्टीमेट से अधिक की निकासी कर ली गई है। इस्टीमेट 3 लाख 38 हजार 350 का है जिसने भी वेंडर तत्कालीन मुखिया व तत्कालीन पंचायत सेवक ने गड़बड़झाला करते हुए अधिक पैसे 3 लाख 55 हजार 162 रु की निकासी कर ली है। वहीं कौनकेल गांव में भी योजना पूरी किए बगैर पैसे की निकासी कर ली गई है।

ग्रामीणों ने कहा- प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, इसलिए घोटालेबाजों का मनोबल बढ़ा

चैनपुर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा और भी योजनाओं की जांच की जाएगी। मजिस्ट्रेट सुनील कुमार खाखा ने कहा कि जांच में और योजना में भी गड़बड़ी से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार निर्माण में भारी घोटाला किया गया है। मगर कमीशन के खेल के कारण किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

जांच के बाद भी दोषी पाए जाने वाले वेंडर के ऊपर कार्रवाई नहीं होती है जिससे इनका मनोबल इतना बढ़ गया है कि फर्जी तरीके से निकासी करना, सरकारी राशि का बंदरबांट करना, योजना को खानापूर्ति के तरह निर्माण करना घटिया निर्माण कर भी यह बचते जा रहे हैं। ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का विकास के लिए आने वाली योजनाओं में कोई गड़बड़ी ना करें।

ग्रामीण क्षेत्र के लोग पानी के लिए इधर उधर भटक रहे हैं सरकार लोगों को पानी के लिए न भटकना पड़े। इसके लिए गांव-गांव में जल मीनार का निर्माण करवा रही है। मगर इसमें भी इतना घोटाला है कि लोगों को प्यासे ही रहना पड़ रहा है। कहीं जलमीनार को घटिया तरीके से बनाया गया है तो कहीं योजना सिर्फ कागज में ही सिमट कर रह गई है। धरातल पर देखने के लिए लोगों को कुछ भी नहीं मिला।

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