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भास्कर ​​​​​​​एक्सक्लूसिव:सूबे में शिक्षा के मंदिर का बदलेगा रंग, गुलाबी से हरा और सफेद होंगे सरकारी स्कूलों के भवन

गुमलाएक महीने पहले
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स्कूल भवन, जिसपर अब गुलाबी से चढ़ेगा हरा रंग। - Dainik Bhaskar
स्कूल भवन, जिसपर अब गुलाबी से चढ़ेगा हरा रंग।
  • सात साल पहले किया गया था ब्राइट पिंक,झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक किरण ने जारी किया निर्देश, इस पर किया जाएगा अमल

झारखंड में एक बार फिर शिक्षा के मंदिर का कलर बदला जा रहा है। इसके तहत जिले के सभी सरकारी स्कूलों पर अब नया रंग चढ़ेगा। सभी प्रकार के स्कूल भवन को गुलाबी से बदलकर हरे और आॅफ व्हाइट रंग से रंगने का फैसला लिया गया है। इसे लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक किरण कुमारी पासी ने सभी जिला को निर्देश जारी किया है।

इसमें उन्होंने कहा कि अभी स्कूलों के भवन गुलाबी रंग के हैं और शौचालयों के लिए नीले रंग का इस्तेमाल किया गया है। अब नए सिरे से रंग-रोगन किया जाएगा। इसके तहत नए और पुराने सभी तरह के स्कूल भवनों के दरवाजों और खिड़कियों का रंग भी गहरा हरा होगा।

साथ ही शौचालय की दीवार भी सफेद और उसमें मेहंदी रंग का बॉर्डर होगा। परिषद की तरफ से तीन ब्रांडों का विकल्प भी सुझाया गया है। एडीपीओ पीयूष कुमार ने बताया कि आदेश से स्कूलों को एक नया रूप मिलेगा। शीघ्र ही इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्कूल के बच्चे अब नए कलेवर में स्कूल को देखेंगे। इसपर तेजी से काम भी शुरू किया जाएगा। जिससे कि स्कूल को साफ-सुथरा बनाया जा सके।

ऐसे बदला रंग... वर्ष 2002-03 में स्कूलों का गुलाबी, 2014-15 में पिंक किया गया था

कई बार बदला स्कूल भवनों का रंग, 2002 से पहले था पीला

वर्ष 2002-2003 में विद्यालय भवनों का रंग पीला से बदल कर गुलाबी किया गया था। परियेाजना निदेशक के स्तर से रंग में बदलाव किया गया था। वर्ष 2014-2015 में स्कूल भवनों के रंग में फिर बदलाव हुआ। स्कूल भवनों का रंग ब्राइट पिंक, बॉर्डर टेराकोटा व खिड़की व दरवाजा का रंग गोल्डन ब्राउन किया गया था। वर्ष 2018-2019 में भवनों के रंग को यथावत रखा गया, पर शौचालय के रंग में बदलाव किया गया था।

राज्य के सरकारी स्कूलों के रंगरोगन के लिए हर साल मिलती है अनुदान राशि
राज्य के सरकारी स्कूलों को प्रतिवर्ष अनुदान राशि दी जाती है। यह राशि आवश्यकतानुसार भवन की मरम्मत, रंग- रोगन व सफाई पर खर्च की जाती है। विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप यह राशि दी जाती है। ऐसे विद्यालय जहां नामांकित बच्चों की संख्या 30 है।

उन विद्यालयों को 10 हजार, 31 से 100 नामांकन वाले स्कूलों को 25 हजार, 101 से 250 तक नामांकन वाले स्कूल को 50 हजार, 251 से एक हजार नामांकन वाले स्कूल को 75 हजार व एक हजार से अधिक नामांकन वाले स्कूलों को एक लाख रुपए का अनुदान मिलता है।

बेहतर शिक्षा और सुविधा पर होना चाहिए था फोकस : मिशिर
भाजपा के जिला महामंत्री मिशिर कुजूर ने सरकार के फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है। कहा कि सरकार स्कूलों को जेएमएम व आरजेडी के रंग में रंगना चाहती है। यदि भाजपा सरकार में विद्यालयों का कलर बदलकर भगवा कर दिया जाता, तो हाय-तौबा मच जाता।

उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान स्कूलों में बेहतर शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन, छात्रों की उपस्थिति और सुविधाओं पर होना चाहिए। जिससे कि छात्रों को इसका लाभ होता, लेकिन गलत मानसिकता का परिणाम है कि स्कूलों की दीवारों पर चढ़े रंग को बदला जा रहा।​​​​​​​

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