मेधा सूची में हेराफेरी के आरोपी पर नहीं हुआ एफआईआर:नामांकन समिति की सहमति के बिना मार्खम कॉलेज में ले लिया एडमिशन

हजारीबागएक महीने पहले
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मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स हजारीबाग में फोर इयर ग्रेजुएशन प्रोग्राम सत्र 2022-26 में हुए नामांकन में नामांकन समिति की सहमति नहीं ली गई। कॉलेज में चांसलर पोर्टल पर आवेदन करने वाले आवेदकों में से अभ्यर्थियों के चयन के लिए नामांकन समिति गठित की गई है। समिति में सभी विभागों के हेड को शामिल किया गया है। अभी तक हुए नामांकन में नामांकन समिति की सहमति लिए बगैर नामांकन करा दिया गया।

कॉलेज स्तर पर कट ऑफ मार्क्स के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर ऑपरेटर ने किया और पहली मेधा सूची पर प्राचार्य के हस्ताक्षर के बाद विश्वविद्यालय को भेज दिया गया विश्वविद्यालय ने उसे वेबसाइट पर अपलोड किया और उसी के आधार पर विद्यार्थियों ने ऑनलाइन नामांकन लिया। मार्खम कॉलेज में नामांकन के लिए दूसरी मेधा सूची भी विश्वविद्यालय ने जारी किया। इसमें भी नामांकन समिति की सहमति नहीं ली गई।

सूची में ऑपरेटर निर्मल कुमार कुशवाहा ने अभ्यर्थी के अंको में हेरफेर कर उसे मेधा सूची में ला दिया था। मामला उजागर होने के बाद विनोबा भावे विश्वविद्यालय के वीसी डॉ मुकुल नारायण के निर्देश पर ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया गया। वीसी ने चांसलर पोर्टल पर जारी हुई मेधा सूची में हेरफेर करने के आरोपी निर्मल कुमार कुशवाहा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश प्राचार्य मार्खम कॉलेज को दिया था। शुक्रवार तक बर्खास्त किए गए कर्मी के ऊपर मुकदमा दर्ज करने का आवेदन नहीं दिया गया है। नामांकन मामले में मार्खम कॉलेज में गठित नामांकन समिति गौण है।

कैसे होता है नामांकन

4 ईयर ग्रेजुएशन प्रोग्राम में नामांकन के लिए अभ्यर्थी चांसलर पोर्टल पर आवेदन करते हैं। अभ्यर्थी ने जिस कॉलेज को चुना है, उसके सभी आवेदकों की सूची विश्वविद्यालय कॉलेज को भेज देता है। कॉलेज में गठित नामांकन समिति अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग का मेघा सूची तैयार करते हैं और उस पर अपना हस्ताक्षर भी करते हैं। चयनित अभ्यर्थियों की सूची पुनः विश्वविद्यालय को भेज दी जाती है और विश्वविद्यालय उसे वेबसाइट पर अपलोड कर देता है। जिसके आधार पर चयनित अभ्यर्थी ऑनलाइन नामांकन कराते हैं। नामांकन के बाद ऑफलाइन सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन होता है।

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