हे राम:फर्जी डाॅक्टर राम ने हजारीबाग के नर्सिंग होम और एक कंपनी के हॉस्पिटल में दी थी सेवा प्रिस्क्रिप्शन में इंज्यूरी भी नहीं लिख पाता

हजारीबाग2 महीने पहले
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रामबाबू प्रसाद से पूछताछ करती पुलिस। - Dainik Bhaskar
रामबाबू प्रसाद से पूछताछ करती पुलिस।

हजारीबाग सदर पुलिस ने जिस फर्जी डॉक्टर जूनियर रेजिडेंट रामबाबू प्रसाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा। वह डेढ़ साल से हजारीबाग मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सर्जरी डिपार्टमेंट में जूनियर रेजिडेंट था। इस संबंध में हॉस्पिटल में उसके साथ काम करने वाले चिकित्सक और कर्मियों ने नाम नहीं छापे जाने के शर्त पर कई खुलासा किया है बताया कि उसकी जॉइनिंग पूर्व सुपरिटेंडेंट द्वारा की गई थी।

उस डॉक्टर को ओपीडी में घायल पहुंचे मरीजों के प्रिस्क्रिप्शन में इंज्यूरी तक लिखने नहीं आता था। उसने जितने भी लीव एप्लीकेशन दिए हैं सभी अशुद्ध होते थे अक्सर एप्लीकेशन वह दूसरों से लिखवाता था। ऐसा देखते हुए भी तत्कालीन सुपरिटेंडेंट ने उसके डिग्री पर कभी संदेह नहीं जताया।

उसके प्रमाण पत्र को एक डॉक्टर होते हुए तत्कालीन सुपरिटेंडेंट ने कैसे क्लीन चिट दे दी और उसकी ज्वाइनिंग करा ली थी। उस डॉक्टर का ज्वाइनिंग लिया जाना ही हॉस्पिटल प्रबंधन की भूमिका को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

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अस्पताल के सीनियर डॉक्टर करते थे राम का सपोर्ट

बताया कि हजारीबाग में जूनियर रेजिडेंट के पद पर कार्य करने के पूर्व शहर के एक नर्सिंग होम में भी वह लंबे समय तक प्रैक्टिस किया। एक बड़ी कंपनी के द्वारा संचालित अस्पताल में भी उसने सेवा दी थी। दैनिक भास्कर ने जब उसकी योग्यता पर सवाल उठाया था तब वर्तमान सुपरिटेंडेंट ने उसे शोकॉज किया। जैसे ही शोकॉज किया वह हॉस्पिटल आना बंद तो कर दिया लेकिन अपने प्रमाण पत्रों को सही बताने में गुरेज नहीं किया।

डॉक्टर सर्जरी एचओडी ओपी श्रीवास्तव के अधीन वह काम कर रहा था। यह बताया गया कि हॉस्पिटल में पदस्थापित सीनियर डॉक्टर जो अक्सर फरार रहते हैं उनके बदले यह ओपीडी सेवा दिया करता था। इसके कारण वह सभी चिकित्सकों का करीबी और दुलरवा बन गया था। फरार रहने वाले चिकित्सकों के सपोर्ट में इसका फर्जीवाड़ा फल फूल रहा था।

रैकेट काे ध्वस्त करना पुलिस की जिम्मेदारी : थाना प्रभारी
उसकी गिरफ्तारी के बाद जहां हजारीबाग मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट ने विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है वही सदर पुलिस भी जांच शुरू कर दी है।

सुपरिटेंडेंट डॉ विनोद कुमार ने कहा कि बीएमसी से प्राप्त रिपोर्ट में फर्जी की पुष्टि हो जाने के बाद अब रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है साथ ही प्रक्रिया के अनुरूप एफआईआर दर्ज करा दिया गया उसकी गिरफ्तारी भी हो गई।

थाना प्रभारी गणेश कुमार सिंह ने कहा कि गिरफ्तार फर्जी चिकित्सक का यह जघन्य अपराध है। इस रैकेट को ध्वस्त करना पुलिस की जिम्मेदारी है और इसमें हम कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। इसको सपोर्ट करने वाले और फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने वाले तक पुलिस पहुंचेगी।

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