महालया आज:जिले में पहली बार 1881 में बंगाली दुर्गा स्थान हुई थी पूजा

हजारीबाग2 महीने पहलेलेखक: कृष्ण कांत सिंह
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जिले में बंगाली दुर्गा स्थान का एक ऐतिहासिक महत्व है। इसका इतिहास 140 साल पुराना है। उस जमाने में जिले में दुर्गा पूजा उठाने का प्रचलन नहीं था। बंगाली परिवार ने ही दुर्गा पूजा की शुरुआत यहां की थी। सबसे बड़ी खासियत इस मंदिर का यह है कि, ऑल इंडिया रेडियो से महालया का स्ताेत्र गायन का लाइव प्रसारण करने वाले बीरेंद्र कृष्ण भद्र का आगमन इस मंदिर में हो चुका है। लोग इनका नाम बड़े ही आदर पूर्वक लेते हैं। इनके स्वर में जब लोग महालया गायन सुनते है तो रोंगटे आज भी खड़े हो जाते हैं। ऐसा लगता है मानो साक्षात मां दुर्गा विराजमान हो चुकी है। महालया के अहले सुबह आज भी घर-घर उनकी आवाज सुनी जाती है। उनकी आवाज ऐसा है मानो मां दुर्गे का आगमन हो चुका है। 1931 में पहली बार महालया का लाइव स्रोत गायन उन्होंने किया था ।

बताते चलें कि यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी हजारीबाग में उनका बंगाली दुर्गा मंदिर आने का प्रमाण है। वे 16.9.1957 में यहां आए थे। श्री भद्र को देश ही नहीं विदेशों में भी दुर्गा पूजा के महालया गायन के लिए जाने थे। वही हजारीबाग के संत कोलंबस कॉलेज में अंग्रेज़ी विषय के अतिथि शिक्षक के रूप में उन्होंने पढ़ाया भी था।

राय बहादुर यदुनाथ मुखर्जी ने बनाया था मंदिर
राय बहादुर यदुनाथ मुखर्जी ने बंगाली दुर्गा मंदिर को बनाया था। दुर्गा पूजा की शुरुआत यहां 1881 से हुई थी। इस संबंध में यूनियन क्लब एंड लाइब्रेरी के कोषाध्यक्ष आशीष चौधरी कहते हैं कि इस मंदिर को बनवाने के लिए प्रफुल्ल मित्रा ने जमीन दान थी। वही यदुनाथ मुखर्जी ने यहां दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। उस जमाने में हजारीबाग जिला एक बहुत बड़ा जिला हुआ करता था, जहां चतरा, कोडरमा, रामगढ़ व गिरिडीह से भी लोग दुर्गा पूजा देखने आया करते थे।

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