अब यहां पुलिस के चार कैंप बने:बूढ़ा पहाड़, जहां 32 सालों से नक्सली रणनीति बनाते थे, 22 दिनों में पुलिस ने जमाया कब्जा चार कैंप बना रख रहे नजर

हजारीबाग2 महीने पहलेलेखक: सुबोध मिश्रा
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बूढ़ा पहाड़ जहां से माओवादियों के पोलितब्यूरो मेंबर सेंट्रल कमिटी मेंबर रिजनल कमेटी मेंबर नक्सली रणनीति तैयार किया करते थे और जिस चोटी से पुलिस पर नजर रखा करते थे आज वहां पुलिस ने 4-4 अपने कैंप बना लिए हैं और उसी चोटी से अब पुलिस माओवादियों पर नजर रख रही है। अब पुलिस उनके दूसरे बड़े साम्राज्य ट्राई जंक्शन, सारंडा, कौलेश्वरी जोन और पारसनाथ पर जबरजस्त प्रहार करने की तैयारी शुरू कर दिया है। उक्त जानकारी देते हुए डीआईजी जगुआर अनूप बिरथरे ने कहा कि बूढ़ा पहाड़ माओवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाना था। जहां से 3 राज्यों का मॉनिटरिंग उग्रवादी किया करते थे । आज उसी बूढ़ा पहाड़ पर हमारे कैंप स्थापित हो गए हैं।

जिस पहाड़ की चोटी पर नक्सलियों का साम्राज्य हुआ करता था आज वह चोटी पर पुलिस का कब्जा है। नक्सलियों का सफाया हो गया है। इससे हमारे विचारधारा और प्रतीकात्मक जीत हुई है। बूढ़ा पहाड़ पर 32 वर्षों से नक्सलियों का साम्राज्य था। उसे पुलिस ने 22 दिनों में ध्वस्त कर दिया।

बिरथरे ने कहा- नक्सलियों का सेफ जोन ट्राई जंक्शन सरायकेला खूंटी और चाईबासा कंबाइंड इलाका है
यह पूछे जाने पर कि अगली बारी कहां की है, बिरथरे ने कहा कि नक्सलियों का एक महत्वपूर्ण सेफ जोन ट्राई जंक्शन सराय केला खूंटी और चाईबासा कंबाइंड इलाका है। जहां अनल का साम्राज्य है। इसके अलावा पारसनाथ में मोहनपुर और बेराटांड में नक्सलियों का साम्राज्य रहा है। इनके अलावा कोर एरिया में भी हम चोट कर रहे हैं। तैयारी ऐसी है कि पूरी तरह से भाकपा माओवादी नक्सली संगठन झारखंड में नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा । उनके अंत की शुरुआत हो गई है।

ऑपरेशन के दौरान पेड़ की जड़ से निकलने वाले झरने से पानी पीते थे जाबांज पुलिसकर्मी
बूढ़ा पहाड़ पर नक्सलियों का पैर उखाड़ कर फतह हासिल करने वाले जांबाज पुलिसकर्मियों ने बताया कि मूसलाधार बारिश में सब कुछ भींग गया था पेड़ की जड़ से निकलने वाले झरने से हम पानी पीते थे। हमने 4- 5 सितंबर को बूढ़ा पहाड़ पर चढ़ाई की। खड़ी चोटी पर चढ़ाई करने में हालत पस्त हो रहे थे लेकिन नक्सलियों से दो-दो हाथ करने का जुनून हम पर सवार था। जिसके बल पर चोटी पर जा पहुंचे। चोटी पर पहुंचते ही मैदान है जहां हमारा कैंप बन गया। पूरा एरिया सैनिटाइज कर दिया गया। मूसलाधार बारिश शुरू हो गई।

प्लास्टिक छोड़कर सब कुछ भींग गया था। इस पहाड़ी से छत्तीसगढ़ झारखंड और बिहार का साम्राज्य नक्सली चला रहे थे। इनका यहां 3 पॉइंट था। झालूडेरा बुढ़ागांव और थलिया। तीनों पॉइंट अलग अलग राज्य और जिले से जुड़े थे। बताया कि पहाड़ी का 50 किलोमीटर से अधिक का एरिया है। पेड़ के जड़ से निकल रहे झरना का पानी पीते थे।पहाड़ी के चोटी से नक्सलियों पर फतह और बड़ी जीत का एहसास हो रहा था। उनमें उत्साह था। इसी के कारण उनके गढ़ पर कब्जा हो रहा है।

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