शिक्षा विभाग:प्लस टू विद्यालयों में रेशनलाइजेशन के नाम पर आरटीई को दरकिनार कर तैयार किया गया पीटीआर

हजारीबाग19 दिन पहले
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प्रारंभिक से उच्चतर माध्यमिक (प्लस टू) विद्यालयों में छात्र अनुपात में शिक्षक भेजे जाने के लिए शिक्षा विभाग ने रेसनलाइजेशन की प्रक्रिया प्रारंभ किया है। इसी के तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक हजारीबाग में विद्यालयों में छात्र शिक्षक अनुपात की औपबंधिक सूची एन आई सी हजारीबाग के वेबसाइट पर जारी किया है। तैयार की गई सूची पर साक्ष्य सहित आपत्ति सोमवार मांगी गई है। पहली से पांचवी और पहली से आठवीं तक के विद्यालयों की तैयार सूची राइट टू एजुकेशन के प्रावधानों को दरकिनार कर तैयार किया गया है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षा सचिव के पत्र का हवाला देते हुए सभी विद्यालय छात्र शिक्षक अनुपात 1:40 तय कर दिया है। जबकि राइट टू एजुकेशन के प्रावधानों को बदलने का अधिकार शिक्षा सचिव को भी नहीं है। राइट टू एजुकेशन संकल्प नहीं बल्कि अधिनियम है। क्या है प्रावधान : राइट टू एजुकेशन में अलग-अलग श्रेणी के विद्यालयों के लिए छात्र शिक्षक अनुपात तय कर दिया गया है।

पहली से पांचवी कक्षा के वैसे विद्यालय जिनमें छात्रों की संख्या 60 तक है, उनमें न्यूनतम 2 शिक्षक होंगे। 61 से 90 बच्चों वाले विद्यालय में तीन और शिक्षक 91 से 120 विद्यार्थी वाले विद्यालय में चार शिक्षक होंगे। 121 से 200 वाले विद्यालय में पांच शिक्षक होंगे। 200 से अधिक छात्र वाले विद्यालय में छात्र शिक्षक अनुपात 1:40 होगा।

छठी से आठवीं कक्षा

ऐसे विद्यालयों में प्रति कक्षा कम से कम शिक्षक होंगे। ऐसे विद्यालयों में विज्ञान, गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा में एक-एक शिक्षक अनिवार्य हैं। छठी से आठवीं कक्षा के लिए छात्र शिक्षक अनुपात 1:35 होगा। ऐसे विद्यालयों में बच्चों की संख्या 100 से अधिक हो वहां नियमित नियमित प्रधानाध्यापक नियुक्त होंगे।प्रारंभिक विद्यालयों में छात्र शिक्षकों के अनुपात में शिक्षकों को चिन्हित कर जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से दो अलग अलग सूची प्रकाशित की गयी है।

इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रारंभिक विद्यालयों के प्रत्यक्ष नियंत्री अधिकारी नहीं हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से निर्गत सूची में 40 बच्चों पर एक शिक्षक के हिसाब से शिक्षकों को सरपलस दिखा दिया गया है। यही मानक पहली से पांचवीं और छठी से आठवीं में भी लागू कर दिया गया है। जारी सूची में पारा शिक्षक की गिनती सरकारी शिक्षकों के साथ की गयी है।

लेकिन उनको सरप्लस की श्रेणी से उनको उनको बाहर कर दिया गया है। पारा शिक्षकों का चयन रिक्ति के विरुद्ध नहीं हुआ है। छात्रों की संख्या के आलोक में हुआ है। जारी सूची में विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों की संख्या, छात्रों की संख्या को गलत बता कर बहुत शिक्षकों को सरपलस बताया जा रहा है। त्रुटियों की भरमार है। कहा जा रहा कि ऐसा दोहन के मकसद से किया गया है। आपत्ति दर्ज करने की बात कह कर भारी अनियमितता पर पर्दा नहीं डालने का प्रयास बताया जा रहा है।

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