भूमि घोटाला मामला:मुख्य सचिव ने बड़कागांव, केरेडारी व कटकमदाग में भूमि घोटाले पर कार्रवाई की रिपोर्ट अवर सचिव से मांगी

हजारीबाग2 महीने पहले
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3000 करोड़ भूमि घोटाला मामले में मुख्य सचिव ने अवर सचिव राजस्व को भूमि घोटाला मामले पर कार्रवाई करते हुए डिटेल रिपोर्ट मांगी है। ताकि पीएमओ को रिपोर्ट भेजी जा सके। मालूम हो कि हजारीबाग के बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग प्रखंड में एनटीपीसी के कोल सहित अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के नाम पर गैर मजरुआ खास, जंगल एवं जंगल झाड़, नदी-नाला, प्रति कादिम आदि सरकारी जमीन को गलत तरीके से फर्जी कागजात बनाकर लगभग तीन हजार करोड़ का मुआवजा घोटाला (अनुमानित) की एसआईटी रिपोर्ट में सीबीआई जांच की अनुशंसा की गई थी। शिकायत कर्ता मंटू सोनी ने पीएमओ को बताया कि एसआईटी रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया।

3000 करोड़ भूमि घोटाला मामले में मुख्य सचिव ने अवर सचिव राजस्व को भूमि घोटाला मामले पर कार्रवाई करते हुए डिटेल रिपोर्ट मांगी है। ताकि पीएमओ को रिपोर्ट भेजी जा सके। मालूम हो कि हजारीबाग के बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग प्रखंड में एनटीपीसी के कोल सहित अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के नाम पर गैर मजरुआ खास, जंगल एवं जंगल झाड़, नदी-नाला, प्रति कादिम आदि सरकारी जमीन को गलत तरीके से फर्जी कागजात बनाकर लगभग तीन हजार करोड़ का मुआवजा घोटाला (अनुमानित) की एसआईटी रिपोर्ट में सीबीआई जांच की अनुशंसा की गई थी। शिकायत कर्ता मंटू सोनी ने पीएमओ को बताया कि एसआईटी रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया।

केस के 7 साल बाद भी न कार्रवाई, न पैसे की रिकवरी
इधर पांडु गांव में सरकारी भूमि पर सार्वजनिक स्थल को अवैध कागजात से जमाबंदी करवाकर एनटीपीसी से 70 लाख रुपया मुआवजा उठाने का मामला सामने आया । जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद उपायुक्त के पत्रांक 1158 के आलोक में अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उपसमाहर्ता की जांच के आधार पर सीओ के ज्ञापांक 351 के तहत केरेडारी अंचल कर्मचारी रितलाल रजक के बयान पर केरेडारी थाना में 30 मई 2016 को कांड संख्या 44/16 धारा 476, 468, 471, 420, 406 ,120 बी दर्ज किया गया था।

जिसमें अब्दुल जब्बार, मो मिर्जामुर, मो रहमान, ताज मियां, इलाही मियां, अब्दुल जनान, मोजिम मियां, मो एबरार, जाहिद मियां पर एफआईआर दर्ज किया गया था। सात साल होने के बाद पुलिस ने अब तक किसी भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अभी तक यह चिन्हित नहीं किया गया है कि फर्जी कागजात पर किस अधिकारी ने जमाबंदी कायम किया और किस कर्मचारी ने रसीद निर्गत किया। जिसके आधार पर उक्त लोगों ने 70 लाख रुपए का मुआवजा प्राप्त कर लिया। एफआईआर के 7 साल हो गए ना कार्रवाई हुई ना पैसों की रिकवरी हुई।

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