दर्दनाक मौत का मामला:हाइटेंशन तार की चपेट में आने वाला युवक नहीं था बिजली मिस्त्री, जबरन लगवाया जा रहा था साइन बोर्ड

हजारीबाग2 महीने पहले
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एनएच 33 बाइपास सिंघानी चौक के समीप संचालित उत्कर्ष इंटर काॅलेज परिसर में 11 हजार के हाइटेंशन तार की चपेट में आने से जबरा कोर्रा निवासी 35 वर्षीय राजकुमार प्रसाद पिता बसंत प्रसाद की हुई दर्दनाक मौत मामले में पुलिस ने पिता का फर्द बयान दर्ज कर लिया है। इस घटनाक्रम में घटना के दौरान कई झूठ सामने आए थे जिस से पर्दा उठ गया। मृतक राजकुमार के बारे में बिजली मिस्त्री कहा जा रहा था जबकि घर वालों ने स्पष्ट किया कि वह बिजली मिस्त्री नहीं था। वह अपना व्यवसाय कर परिवार चला रहा था।

सामाजिक कार्यों व व्यक्तिगत कार्यों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे। राजकुमार कुंवारा था। वह घर का इकलौता कमाऊ था। आखिर निजी बिजली मिस्त्री का शगुफा किस साजिश के तहत घटना के दौरान उड़ाया गया इस पर सवाल उठने लगा है। उसकी मौत उत्कर्ष इंटर कॉलेज में बोर्ड लगाने के दौरान हुई। वहीं इस क्रम में इंटर कालेज के निदेशक राजन कुमार (लालमोहन )तथा उसके भाई रंजन कुमार भी घायल हो गए थे।

45 मिनट बाद एंबुलेंस से राजकुमार ले गए अस्पताल, इलाज कराने में कर दी गई देरी
घटना के बाद गंभीर रूप से घायल राजकुमार को घटनास्थल पर ही छोड़ दिया गया और जो आंशिक घायल हुए थे कॉलेज के निदेशक और उनके भाई उन दोनों को आनन-फानन में हॉस्पिटल लाया गया। जिसमें लगभग 45 मिनट से अधिक समय व्यतीत हो गए। उसके बाद एंबुलेंस बुलाया गया। जब तक घायल राजकुमार को हॉस्पिटल लाया गया उसकी स्थिति बिल्कुल बिगड़ चुकी थी। उसकी गंभीरता को देख कर सबसे पहले उसे हॉस्पिटल लाया गया होता तो उसकी जान बच जाती। फर्द बयान में राजकुमार के पिता बसंत प्रसाद ने कहा है कि निदेशक का भाई विकास कुमार से बेटे की दोस्ती थी।

उसने लगातार आठ से 9 बार मेरे बेटे के मोबाइल पर फोन करके बुला रहा था। बावजूद इसके जब मेरा बेटा नहीं गया तो वह खुद साढ़े नौ बजे घर पर आ गया और बगैर घर में कुछ बताए उसे अपने साथ ले गया। मैंने उसे रोका भी और बेटा को खाना खाने के लिए भी कहा लेकिन विकास ने कहा कि तुरंत वापस लौट रहा है। जब मेरा बेटा गया तो फिर उसकी लाश ही मेरे घर आई।

छत के ऊपर से गुजरा था 11 हजार वोल्ट का तार
घटना के संबंध में बताया जाता है कि कालेज छत से 11 हजार वोल्ट के हाइटेंशन तार गुजरा है। संभावित खतरे को देखते हुए निदेशक के कहने पर राजकुमार को खतरे भरे काम को कराया गया। मौके पर मौजूद अन्य शिक्षक किसी तरह तार के चपेट से तीनों को अलग किया। जबतक सहायता पहुंच पाती राजकुमार की मौत हो गई। कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही और जबरदस्ती के कारण बसंत प्रसाद के घर का चिराग राजकुमार बुझ गया। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं की तार के खतरे को देखते हुए दरवाज़ा में फंसे बोर्ड को हटाने के लिए राजकुमार को बुलाकर झोंक दिया गया।

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