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सम्मान:केरा के सत्यप्रकाश काे मेघो मल्हार कार्यक्रम में कवि सम्मान

चाईबासा6 दिन पहले
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  • बैंक कर्मचारी रहते हुए कई प्रकार की रचनाओं में रही है रुचि, अभिनय में कई अवाॅर्ड मिले

लाेककला के अभिनय में हीराे की पहचान खुले मंच से ही हाेती है। ठीक वैसे ही हीरा हैं चक्रधरपुर प्रखंड के केरा गांव के सत्यप्रकाश कर। हाल ही में झारखंड ग्रामीण बैंक से रिटायर्ड कर काे ओडिशा के काकटपुर में प्राची साहित्य संसद द्वारा आयोजित वर्षा साहित्य आसोर “मेघो मल्हार”कार्यक्रम में विशिष्ट कवि सम्मान से सम्मानित किया गया है।

ब्राह्मण परिवार में जन्मे सत्यप्रकाश साल 1985 से 2014 तक झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक में लिपिक सह रोकड़िया रहे। इस दाैरान काव्य व कविता रचना में सक्रिय रहे। उनकी प्रथम कविता नाै क्लास में पढ़ने के दाैरान रही। जिसमें एक ट्रक ड्राइवर की जिंदगी में तकलीफ का चित्रण शीर्षक “हाय हाय रे मजबूरी”नवम श्रैणी में हिंदी कविता। वहीं नाटक मंचन-शिशुसंघ केरा पांच वर्ष की आयु से बाद में केरा के सबुज संघ कला निकेतन में ओड़िया नाटक में संयोजन निर्देशन किया।

बचपन से ही कलाकारी में खास कर अभिनय में दम रहने के कारण पढ़ाई के दिनाें में सत्यप्रकाश ने जवाहर लाल नेहरू कालेज के वार्षिक उत्सव 1978 में ओड़िया नाटक “मो झिओरो बाहाघरो” में दिव्यांग का किरदार किया। तत्कालीन कुलपति डॉ. अनुज कुमार धान प्रभावित (खुश)हो कर कालेज में पूर्ण रूप से निशुल्क शिक्षा जहां तक पढ़े पठन-पाठन की व्यवस्था की थी। वहीं उनके अभिनय देखकर कमला गुड़ाखु फ्रैक्टरी के मालिक ने एक नया हरक्यूलिस साईकिल उपहार में दिया था। चार बार सम्मानित हाे चुके हैं कवि सम्मान से सत्यप्रकाश कई किताबें भी लिख रहे हैं। उन्हाेंने शांति,सत्य,मणिषो पणिआ, जउतुको, ठिकोणा, गांआ चाटोशाली, बोका,शरोधाबाली, चषमा,जागो कवि, गांआ टी आमोरो गला बदोली इत्यादि के अलावे अनुभूति रे जगन्नाथ, कुकरो प्रति सावधान आदि पर अपने विचार लिखे।

जीवन में कई सम्मान मिला, लेकिन एक अफसाेस भी है। साल 1990 में प्रकाश झा के टीवी सीरियल व डाक्यूमेंट्री फिल्म में काम करने का मौका मिला था। परंतु बैंक प्रबंधन से छुट्टी स्वीकृत नहीं करने के कारण कर नहीं पाया था। अब काव्य रचना ही मेरी दुनिया है, इसी में आनंद आता है। -सत्यप्रकाश कर, कवि व साहित्यकार, केरा

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