सावन विशेष:बामेदिरी में विराजमान हैं हर मनोकामना पूरी करनेे वाले भगवान धुबलेश्वरनाथ

कुमारडुंगी2 महीने पहलेलेखक: रेहान अख्तर
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  • भक्त और भगवान के बीच कोरोना बनी दीवार, सरकार ने बंद किए मंदिर के द्वार

1820-21 में एक बार बगल के पड़ोसी राज्य ओडिशा के पुजारी रमेश चन्द्र मिश्रा चाईबासा से देर रात अपने घर रोरुवां बैलगाड़ी से लौट रहे थे। कुमारडुंगी में वन क्षेत्र के बीच में उनकी गाड़ी गड्ढे में फंस गई। किसी तरह वह अपनी गाड़ी को निकालकर घर पहुंचा और सो गया। रात्रि में उसे स्वप्न में भगवान शंकर कहा-तुम्हारे गाड़ी का जहां पहिया फंसा था, वहां खुदाई करवाओ।

वहां मेरा शिवलिंग के रूप में निवास है। लोग मुझे बाबा धुबलेश्वर नाथ के नाम से जानेंगे। इसके बाद रमेश ने खुदाई कराई। फावड़ा शिवलिंग से टकराया तो खून की धारा बह निकली। इसके बाद से ही यहां लोग पूजा-पाठ करने लगे।

कुमारडुंगी से पांच किमी दूर स्थित मंदिर

राज्य पथ मार्ग में कुमारडुंगी से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित बामेदिरी में बाबा धुबलेश्वरनाथ का मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केन्द्र है। यहां सावन महीने के शुरू होते ही मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है।

पुजारी के वंशज हैं निर्मल मिश्रा

वर्तमान में पुजारी रमेशचन्द्र मिश्रा के वंशज निर्मल चन्द्र मिश्रा मंदिर के पुजारी हैं, उन्होंने बताया कि श्रावणमास में यहां सैकड़ों भक्त जलाभिषेक करते हैं। मंदिर आने वाले कांवरिए मंदिर से 34 किमी दूर जैंतगढ़ के परम पावन वैतरणी नदी स्थित घाट से जल भरकर बाबा धुबलेश्वर नाथ का जलाभिषेक करते हैं और पुण्य के भागी बनते हैं।

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