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भारी वर्षा:औसत से 300 मिमी कम हुई बारिश, प्रखंड में 30 प्रतिशत ही धान रोपनी, वर्षा के अभाव से बनी सुखाड़ की स्थिति

जैंतगढ़20 दिन पहले
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मानसून की शुरुआत में अच्छी वर्षा के बाद अचानक मानसून के रूठने से समूचे जगन्नाथपुर प्रखंड में सुखाड़ की स्थिति बन गई है। मानसून के शुरू होते ही लगातार भारी वर्षा होने की वजह से किसान छींटा विधि से धान की बोआई नही कर पाए। गौरतलब है कि किसान रोपनी के लिए बिचड़ा तैयार करने में जुट गए। मगर बिचड़ा तैयार होने से पूर्व ही मानसून धोखा देना शुरू कर दिया। वर्षा रूक गई। बिचड़े बर्बाद होने लगे।

खेतों में दरार पड़ने लगा। किसान परेशान हो गए।क्षेत्र में केवल 30 प्रतिशत किसान ही रोपनी कर पाए। अब मानसून के धोखा देने से 30 प्रतिशत फसल पर भी आफत आन पड़ा है। किसान सिर पर हाथ धर कर रो रहे हैं। इस वर्ष मानसून ठीक समय पर आ गया था। मानसून के आते ही उसने अपना रंग दिखा दिया। एक महीने में ही 400 मिमी वर्षा हो गई। वर्षा लगातार होती रही। किसानों को धान की बोआई करने का भी मौका नहीं मिला।

किसान किसी तरह रोपनी के लिए धान का बिचड़ा तैयार करने लगे। मगर मानसून को यह मंजूर नही हुआ और वह रूठ गया। अब आलम यह है की ऊपर के जमीन की फसल बर्बाद होने की कगार पर है। थोड़ा बहुत नीचे की खेती पर उम्मीद है। अगर वर्षा हुई तो। कृषि विज्ञान केंद्र जगन्नाथपुर से मिली जानकारी के अनुसार प्रखंड में औसत वर्षा 900 मिमी होती है। मगर इस वर्ष केवल 600 मिमी ही वर्षा हुई है। औसत से 300 मिमी कम वर्षा हुई। मानसून के शुरुआत में ही 400 मिमी वर्षा हो चुकी थी। बाकी ढाई महीने में मात्र 200 मिमी ही वर्षा हो पाई है।

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