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विश्वकर्मा पूजा प्राचीन एवं आधुनिकता:विश्वकर्मा विश्व ब्रह्मांड के सर्वप्रथम इंजीनियर एवं वास्तुशिल्पी

चाईबासा11 दिन पहले
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  • विश्वकर्मीय ग्रन्थ बहु प्राचीन, इसमें वास्तु विद्या, रत्न व स्थादि वाहन निर्माण कौशल की चर्चा

विश्वकर्मा पूजा के बारे में केयू के कुलपति ने अपने विचार रखते हुए कहा-समसामयिक सांस्कृतिक स्वरूप विश्वकर्मा विश्व ब्रह्मांड के सर्व प्रथम इंजीनियर एवं वास्तुशिल्पी हैं। आज भी अत्यन्त भव्यता से छोटी-छोटी दुकान से लेकर बड़े-बड़े उद्योगों में विश्वकर्मा जी की पूजा होती है।

विश्वकर्मा समस्त औजारों एवं अस्त्र-शस्त्र की देवता होने के कारण विभिन्न आयुधों का भी पूजन उक्त तिथि में होता है। विश्वकर्मा द्वारा रचित विश्वकर्मीय ग्रन्थ बहु प्राचीन है। इसमें वास्तु विद्या, रत्न एवं स्थादि वाहन निर्माण कौशल की चर्चा की गई है। आज विश्वकर्मा पूजन पर ब्रह्मांड के आद्य स्थपति, यन्त्रविद्या एवं उद्योग के प्रथम गुरु का शत शत वंदन करते हैं।

परम्परा के अनुसार, ब्रह्मा जी के धर्म नामक पुत्र के सातवें सन्तान का नाम था वास्तु। वास्तु का पुत्र विश्वकर्मा जो अपने पिता की भांति महान शिल्पकार बने। विश्वकर्मा जलपात्र, ज्ञान सूत्र, पुस्तक, मुकुट धारण पूर्वक हंस पर आसीन होते हैं। परम्परा के अनुसार, श्री जगन्नाथ, बलभद्र, माता सुभद्रा एवं सुदर्शन का निर्माण एक ब्राह्मण के रूप में आकर विश्वकर्मा ने किया था। एक बन्द कमरे के अन्दर यह कार्य करने की शर्त थी। मूर्ति निर्माण के पूर्व दरवाजा खुलने से वे अनाहित हो गये जिस कारण मूर्ति अधगढ़ी रह गई। आज भी तीन देवताओं के पैर व मां सुभद्रा के हाथ नहीं है।

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