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कल से नवरात्र:सन 1857 की परंपरा रहेगी कायम, चक्रधरपुर में पहली बार सिर्फ 60 सेवकाें के कंधों पर सवार हाेकर निकलेगा मां दुर्गा का मशाल जुलूस

चक्रधरपुर15 दिन पहले
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2019 में मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते श्रद्धालु।

चक्रधरपुर में 1857 के सिपाही गदर के समय से आयोजित होने वाला मां भगवती का कंधे पर प्रतिमा विसर्जन काेराेना काल में भी हाेगा। आदि पूजा समिति ने इस परंपरागत ऐेतिहासिक कार्यक्रम काे इस बार भी जारी रखने का निर्णय लिया है, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस आयोजन में कई कटौतियां की गई हैं।

इस बार सैकड़ाें श्रद्धालुओं के बजाय पारी-पारी से सिर्फ 60-60 सेवक (वॉलेंटियर) ही प्रतिमा को उठाएंगे। इसके लिए तीन टीम में कुल 180 सेवकाें का चयन हाेगा। इन सबको आई कार्ड भी जारी हाेगा। इस संबंध में बुधवार देर शाम गुंडिचा मंदिर (दुर्गा मंदिर) में आदि पूजा समिति की बैठक दया पाणि की अध्यक्षता में हुई। इसमें कई निर्णय लिए गए।

बैठक में समिति के उपाध्यक्ष अश्विनी मंडल, लोबो मंडल, सचिव अशोक षाड़ंगी, संयुक्त सचिव सपन कुमार मिस्त्री, दिनेश जेना, कोषाध्यक्ष पवित्र मोहन मंडल के अलावा डिक्की मंडल, वेद प्रकाश दास, शुभेंदु षाड़ंगी, अश्विनी दास, नंदलाल मांझी, बंटी मंडल, देवेन मंडल, समीर मिस्त्री, रॉकी मंडल, विक्की दास, मनोज दास, किस्टो दास, मुन्ना महापात्र, महेश मिस्त्री, रामकृष्णा मंडल, अमित कुमार, निमाई दास, सुदामा मिस्त्री आदि मौजूद थे।

इसलिए ऐेतिहासिक: क्रांतिकारी राजा के मशाल जुलूस को देख अंग्रेज भी घबरा गए थे

महाराजा अर्जुन सिंह 1857 में सिपाही विद्राेह के दौरान वे जंगल में रहकर गुरिल्ला युद्ध कर रहे थे। इस दाैरान राजमहल में मां दुर्गा की पूजा आयोजित थी। पूजा में अर्जुन सिंह का आना जरूरी था। लेकिन अंग्रेजों ने नवरात्र के समय से ही राजमहल काे घेर लिया था। यह नजारा देख राजा की प्रजा और क्रांतिकारियों की भीड़ विजयादशमी के दिन राजमहल में गांव-गांव से आकर जुटने लगी।

लाखाें की मशाल देख अंग्रेज सैनिक भी घबरा गये। इसी बीच महल के अंदर से मां के दर्शन कर विशाल मशाल जुलूस के साथ महाराजा अर्जुन सिंह मां की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले गए। तबसे इस परंपरा काे चक्रधरपुर में निभाया जा रहा है।

इस बार ऐसे हाेगा विसर्जन

आदि पूजा दुर्गा के विसर्जन के लिए तीन ग्रुप में सेवक मां दुर्गा की प्रतिमा को कंधे पर उठाकर विसर्जन करेंगे। एक ग्रुप में 60 लोग होंगे। इनमें 30 प्रतिमा के आगे और 30 प्रतिमा के पीछे रहेंगे। पहला ग्रुप मां दुर्गा की प्रतिमा को मंदिर से जग्गू दीवान चौक पहुंचाएगा। दूसरा ग्रुप जग्गू दीवान चौक से भगत सिंह चौक तक जाएगा। तीसरा और अंतिम ग्रुप भगत सिंह चौक से लेकर नदी घाट तक प्रतिमा ले जाएगा। इन 180 सेवकों का चयन कमेटी के पदाधिकारी करेंगे। इन सेवकों को अलग यूनिफार्म और पहचान पत्र भी मिलेगा।

ये निर्णय लिए गए

  • पहले की तरह ही मां दुर्गा की प्रतिमा को मशाल जुलूस के साथ कंधे पर बिठाकर विदाई दी जाएगी।
  • दुर्गा पूजा में जुलूस के मार्ग में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
  • अनुष्ठान के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मास्क व सैनेटाइजर का प्रयोग करना होगा।

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