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खेती की नई तकनीक:अब ड्रोन से खेतों में होगा दवा का छिड़काव, 60 फीट की ऊंचाई से करेगा स्प्रे

गालूडीह13 दिन पहलेलेखक: सुनील चटर्जी
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दवा के छिड़काव के लिए ड्रोन उड़ाता टेक्नीशियन। - Dainik Bhaskar
दवा के छिड़काव के लिए ड्रोन उड़ाता टेक्नीशियन।
  • बदलते समय में उन्नत खेती के लिए आधुनिक उपकरणों का लिया जा रहा सहारा, कम जमीन पर हो रही ज्यादा उपज

बदलते समय में उन्नत खेती के लिए ड्रोन सबसे ज्यादा लाभकारी है। इसके सहारे खेतों में सिचांई, दवा का छिड़काव व फसल के रखरखाव की जानकारी हो सकेगी। पहली बार दारीसाई कृषि अनुसंधान केन्द्र में ड्रोन का इस्तेमाल कर किसान को दिखाया। खेतों में स्प्रे करते देख किसान दंग रह गए। ड्रोन के बारे में किसानों को जानकारी देने के लिए चेन्नई स्थित गरूड़ एयराे स्पेस कंपनी के प्रतिनिधि आए थे।

कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि ड्रोन से किसान अपने खेतों में स्प्रे कर सकते हैं। किसानों को अब स्प्रे करने के लिए मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे स्वास्थ्य काे भी किसी प्रकार का नुकसान नहीं हाेगा। ड्रोन की उपयोगिता जानने के लिए पोटका, पटमदा, घाटशिला, बहरागोड़ा से 50 दारीसाई पहुंचें थे।

इस संबंध में गरूड़ एयरो स्पेस कंपनी के टेक्नीशियन आर कल्याण व महेश कुमार ने बताया कि किसानों की सुविधा को देखते हुए कंपनी द्वारा विशेष ड्रोन बनाई गई है। इस स्प्रे ड्रोन की कीमत लगभग 6 लाख रुपए है। यह 15 मिनट में 1 एकड़ जमीन पर 60 फीट की ऊंचाई पर हवा में उड़ते हुए दवाई का छिड़काव कर सकता है। प्रति एकड़ जमीन स्प्रे करने में 6 साै रुपए खर्च एंगा। कम से कम 150 एकड़ जमीन स्प्रे कराना हो तो कंपनी के प्रतिनिधि खुद आकर स्प्रे कर देगें। इसके लिए किसानों को समूह बनाकर छिड़काव कराने सेे ज्यादा लाभ होगा। इस दौरान ड्रोन से छिड़काव करकेे किसानों को दिखाया गया।

नेटवर्क नहीं मिलने पर खेत में गिरा ड्रोन, कोई नुकसान नहीं
कुछ तकनीकी कारणों से ड्रोन उड़ते उड़ते गिर गया। हालांकि इसमें किसी काे काेई नुकसान नहीं हुआ। टेक्नीशियन ने बताया कि द्रोण जीपीएस सिस्टम से उड़ता है। नेटवर्क नहीं मिलने के कारण नीचे गिर गया। यहां बता दें कि हरी सब्जियां, धान व गेहूं की फसल में अक्सर कीड़े लगते हैं। हाथ से छिड़काव करने पर पूरी तरह खेतों में दवाई का छिड़काव नहीं हो पाता है। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। ड्रोन से छिड़काव करने पर समुचित रूप से खेतों में दवाई पहुंच पाएगा तथा कीड़ा मकोड़ा मर जाएगें। माैके पर जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कालिंदी, मुकेश कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ. आरती वीणा एक्का, डा रविंद्र मोहन मिश्रा, डाॅ. जी मार्डी, डा देवाशीष महतो आदि के साथ कई वैज्ञानिक एवं किसान उपस्थित थे।

300 लीटर पानी लेकर उड़ सकता है ड्रोन : बताया कि ड्रोन एक बार में तीन सौ लीटर पानी लेकर खेतों पर उड़ेगा, जो मात्र दस लीटर पानी से एक एकड़ में लगी फसल पर सिर्फ बीस मिनट मे छिड़काव कर देगा। एक बार चार्ज बैट्री तीन घंटे तक ड्रोन को उड़ान भरने में मदद करेगी। इससे समय और पैसे की बचत होगी। साथ ही फसलों पर जरूरत से ज्यादा दवा इस्तेमाल नही होगा। ड्रोन से आम, लीची के पेड़ों पर भी दवा का सहजता से छिड़काव हो सकेगा।

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