हेल्थ सिस्टम फेल:रिम्स ले जाने के लिए नहीं हुई गाड़ी की व्यवस्था, बीमार सबर की मौत

गालूडीह21 दिन पहले
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बेटे के शव के पास रोती-बिलखती मां। - Dainik Bhaskar
बेटे के शव के पास रोती-बिलखती मां।
  • एमजीएम में इलाज करा घर आने के एक सप्ताह बाद सुकु की मौत

आखिरकार घाटशिला प्रखंड के दारीसाई सबर बस्ती में बुद्धेश्वर सबर के छोटे पुत्र सुकु सबर (11) की शुक्रवार की देर रात तबीयत खराब हाेने के बाद मौत हो गयी। उक्त किशोर को खून की कमी की बीमारी थी। एमजीएम अस्पताल में इलाज चल रहा था। पिछले शनिवार को अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। चिकित्सकाें ने उसका इलाज रांची रिम्स में कराने की सलाह दी थी। रांची कैसे जाएगा इसकी व्यवस्था नहीं की गई। घर आने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ती गयी और उसकी मौत हो गई।

मां निशदा सबर ने बताया कि उसके दाे बेटे हैं, जिसमें सुकु सबर छाेटा था। उसे खून की कमी की बीमारी थी। सुकु सबर के इलाज से संबंधित खबर दैनिक भास्कर में 7 सितंबर काे प्रकाशित की गई थी। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया था। उसे एमजीएम इलाज केे लिए भेजा गया था। शनिवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार में बड़ाखुर्शी पंचायत के पंचायत प्रतिनिधि हरि पद सिंह एवं समाजसेवी मंगल कर्मकार ने सहयोग किया। बेटे की मौत से आहत पिता बुद्धेश्वर सबर ने बताया कि वह वीआईपी का बेटा होता तो उसकी जान बच सकती थी।

पिता ने कहा- रामभरोसे चल रहा था इलाज
बेटे की मौत से सदमे में आए पिता ने बताया कि उसके बेटे की नहीं बल्कि हेल्थ सिस्टम की मौत हो गई। सरकार केवल दावा करती है कि सबरों के उत्थान के लिए हर तरह की सुविधा दी जा रही है। धरातल पर कुछ भी नहीं दिखता है। उसके बीमार बच्चें का इलाज रामभरोसे हो रहा था। बेटे को बचाने के लिए मेरे सारे जतन अब फेल हो गए और वह बेटा को बचा नहीं पाया। डाक्टरों ने बताया था कि उसे बेहतर इलाज की जरूरत है।

अगर उसका ठीक से इलाज नहीं हुआ तो कुछ ही दिन इस दुनिया में रह पाएगा। डाक्टरों का कहा सत्य हुआ और वह दुनिया से विदा ले लिया। बच्चें का शव जब घर पहुंचा तो इसके बाद उसके पिता का तो रोना हुआ, वह दिल दहला देने वाला था। मां तो बेसुध थी। गांव के बाहर एक कब्र खोदी गई, उसमें उसे दफना दिया गया।

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