जन संकल्प से हारेगा कोरोना:मेरे दो बेटों ने साथ दिया, हौसला नहीं खोया और जीत गया पूरा परिवार- सुमन

घाटशिला6 महीने पहले
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  • गंभीर संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वाले कश्यप परिवार की पढ़िए कहानी

कोरोना, यह शब्द ऐसा है कि सुनते ही दिलो-दिमाग पर डर छा जाता। पिछले साल कोरोना का खौफ इतना बढ़ चुका था कि जहां एक मरीज मिलता उस पूरे क्षेत्र को ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मिलकर कंटेनमेंट जोन बना देते थे, जहां न कोई आ सकता और न कोई कहीं जा सकता। कोरोना संक्रमित परिवार से लोग दूरी बना लेते। बात तक नहीं करते। कोरोनावायरस की दूसरी लहर में मेरे परिवार को भी यह वायरस अपनी जकड़ में ले लेगा सोचा भी नहीं था।

पर ऐसा हुआ और मेरा पूरा परिवार कोरोना की चपेट में आ गया। ऐसा कहना है दाहीगोड़ा निवासी सुमन कश्यप का, उन्हाेंने यह कहानी भास्कर सेे कोरोना निगेटिव होने के बाद साझा की। उन्हाेंने आगे बताया- मेरे पति व मेरे दो जुड़वां बेटे जिनकी उम्र महज 13 वर्ष की है। सोच सकते हैं कि मुझ पर क्या बीत रही होगी? पति को हल्का बुखार आया तो अनुमंडल अस्पताल घाटशिला कोविड जांच कराया। वहां उन्हें पाॅजिटिव बताया गया। इसके बाद बताया गया कि वे आइसोलेट हो जाएं व घर के अन्य सदस्यों का भी कोरोना टेस्ट करवाया। कोरोना टेस्ट जब हुआ तो मैं व मेरे दोनाें बेटों को भी पाॅजिटिव रिपोर्ट आ गयी।

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