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72 साल बाद भी गांव तक पक्की सड़क नहीं:नदी से होकर प्रखंड कार्यालय जाते हैं रोलडीह के वाशिंदे

जादूगोड़ा7 दिन पहले
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पोटका प्रखंड कार्यालय जाने के लिए दूध नदी को पार करता एक ग्रामीण।
  • वोट बहिष्कार की धमकी पर बीडीओ ने दिया था आश्वासन

पोटका प्रखंड की धीरोल पंचायत के रोलडीह गांव के लोग अपनी जान दांव पर लगाकर नदी पार कर पोटका प्रखंड पहुंचते हैं। उक्त गांव दो तरफ से नदी-नाले से घिरा हुआ है। जनप्रतिनिधि तथा प्रशासनिक उपेक्षा केे कारण 50 साल से इस गांव तक एक सड़क तक का निर्माण नहीं हो सका है। लाेगाें काे दूध नदी काे पार कर पोटका प्रखंड कार्यालय या जमशेदपुर जाना पड़ता है।

बरसात के मौसम में दोनों रास्तें बंद हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में गांव में लोगों को गांव में बंधक जैसा रहना पड़ता है। दूसरी जगह जाने के लिए लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। बरसात में नदी में पानी के तेज बहाव में बहने का खतरा बना रहता है। ग्रामीण श्यामल गोप, सुधाकर गोप, आकाश गोप ने बताया- बरसात में मरीजाें को कंधे पर लादकर 25 किलोमीटर का सफर तय कर पोटका या जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल लाना पड़ता है। आज तक किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने इसकी सुधि नहीं ली है।

विकास की अनदेखी पर विस चुनाव में वाेट नहीं देने का बुलंद किया था नारा

ग्रामीणों ने विकास की अनदेखी काे लेकर कई बार चुनाव से पहले विकास नहीं ताे वाेट नहीं का नारा बुलंद किया था। 2019 विधानसभा चुनाव में भी वोट बहिष्कार की बात कही गई। इसके बाद तत्कालीन बीडीओ कपिल कुमार द्वारा पुलिया बनाने का लिखित आश्वासन देने के बाद ग्रामीणाें ने वोट बहिष्कार का फैसला टाल दिया।

लेकिन चुनाव खत्म हाेते ही प्रशासनिक अधिकारी आश्वासन काे भूल गए। विधानसभा चुनाव बीते 10 महीने गुजर गए हैं, लेकिन पुलिया को लेकर कोई पहल नहीं की गई है। बहरहाल देखना यह है कि ग्रामीणों को इन परेशानियों से कब राहत मिलेगी।

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