मजदूरों की समस्या / जमीन-मोबाइल बेच चेन्नई से घाटशिला के लिए वाहन बुक किया था, चालक 96 किमी पहले छोड़कर भागा

Sold the land-mobile, had booked a vehicle from Chennai to Ghatshila, the driver ran away 96 km before
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Sold the land-mobile, had booked a vehicle from Chennai to Ghatshila, the driver ran away 96 km before

  • चेन्नई के निकट कांचीपुरम से लौटे घाटशिला के 39 मजदूरों ने क्वारेंटाइन सेंटर में सुनाई आपबीती
  • तपती धूप में रेल चक्का लदे ट्रेलर पर सवार होकर घाटशिला पहुंचे, हाथ-पैर में पड़े छाले

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:51 AM IST

घाटशिला. दूसरे राज्यों से प्रवासी मजदूरों को आने का सिलसिला जारी है। प्रतिदिन प. बंगाल तथा ओडिशा के रास्ते एक से डेढ़ हजार प्रवासी मजदूरों का आवागमन हो रहा है। हाइवे पर ट्रेलर में सवार मजदूरों की तस्वीर देखी जा सकती है। कोई पैदल तो कोई ट्रेलर से अपने गांव की ओर जा रहेे हैं। कुछ मजदूर घर की जमीन गिरवी रखकर, गैस सिलेंडर तथा स्मार्टफोन बेचकर दो बस 3 लाख रुपए में बुक कर यहां पहुंचे हैं। 20 मई को दो वाहनों पर सवार होकर घाटशिला के लिए रवाना हुए। चालक ने धोखे से 96 किमी पहले ओडिशा के बारीपदा में ही उतारकर भाग गया। 
उसके बाद वहां से पैदल चलकर जामशोला बाॅर्डर तक आए। झारखंड बाॅर्डर पर पहुंचकर फिर ट्रेलर पर चढ़कर घाटशिला पहुंचे। इस दौरान जहां पैदल चलते थे वहां के लोग काफी परेशान करते थे। उन्हें अपने देश के नहीं मानते थे। गांव में घुसने पर पत्थर फेंकते थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे वे इस देश के नागरिक नहीं होकर विदेशी हों। रास्ते में कहीं कोई पानी नहीं लेने देता था। दुकान से कुछ खरीदना चाहते थे तो दुकानदार इंकार कर देता था। भूखे-प्यासे रहकर पैदल ही सफर कर यहां तक पहुंचे। 
इन प्रवासी मजदूर‌ों ने दैनिक भास्कर को रूला देने वाली कहानी बताई। पैदल चल रहे बिहार के कुछ मजदूरों को पुलिस और प्रशासन ने बाॅर्डर पर ऐसे ट्रकों और मालवाहक वाहनों पर भी बैठा दिया जिस पर रेल के लोहे के पहिए लोड थे। लोहे की अन्य सामग्री भी लोड थी। ऐसे में तेज धूप में लोहा तपने लगता था। चिलचिलाती धूप में लोहा के रेल चक्का लोेड ट्रेलर में सवार मजदूरों के पैरों व हाथों में छाले पड़ गए थे। 

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