लॉकडाउन / शहर में सेवाभाव की चल रही प्रतिस्पर्धा, कोई प्रवासी मजदूरों की पीड़ा मिटाता तो कोई धूप में जलते पांवों में चप्पल पहनाता

The ongoing competition of service in the city, if one eradicates the suffering of migrant laborers, then one would wear slippers in the feet burning in the sun.
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The ongoing competition of service in the city, if one eradicates the suffering of migrant laborers, then one would wear slippers in the feet burning in the sun.

  • किसी के घर सेे मूढ़ी तो किसी के घर से रोटी, पराठा और सब्जी का कलेक्शन

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:58 AM IST

घाटशिला. शहर में सेवाभाव की एक बेहतरीन प्रतिस्पर्धा चल रही है। एक दूसरे से अागेे कुछ करने की होड़ सी मची हुई है। इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले कई प्रतिभागी हैं। किसी का नाम अखबार में छपता है तो किसी को इसका शौक नहीं है। सुबह काशिदा से लेकर फूलडुंगरी चौक तक हाइवे पर कुछ ऐसे ही जुनूनी लोगों की कतार खड़ी दिखेगी। कोेई प्रवासी मजदूरों की पीड़ा मिटाता तो कोई धूप में जलते पांवों में चप्पल पहनाता। इसके अलावा भोजन व पानी पिलाने तथा मास्क पहनाने की भी होड़ सी लग गई है। यह सुखद सेवाभाव यहां के लोगों को विरासत में मिली है। पहले एक दो लोगों ने यह अभियान शुरू किया था। अब धीरे-धीरे यह कांरवा चल पड़ा। किसी के घर सेे मूढ़ी तो किसी के घर से रोटी और पराठा तो किसी केे घर से सब्जी का कलेक्शन हो जाता है।

सुबह 9 बजते-बजते लोग हाइवे पर हाजिर हो जाते हैं। फिर सड़क से गुजरने वाले प्रवासी मजदूरों को भोजन कराने से लेकर मास्क वितरण का सिलसिला दोपहर तक चलता है। बीते एक सप्ताह से यह अभियान चल रहा है। घाटशिला काॅलेज के शिक्षक इंदल पासवान, डा. नरेश कुमार, रिटायर हाईस्कूल के शिक्षक दिप्तीश कुईला, देशपरगना बैजू मुर्मू, शिक्षिका डेजी सेवा, छात्रा सोनल पटनायक, छात्र बोधिसत्व कीर्ति, मारवाड़ी महिला मंच की अनिता अग्रवाल जैसेे न जाने कितने जुनूनी प्रवासी मजदूरों के लिए अवतार से कम नहीं जो अपना कामधाम छोड़कर सड़क पर कड़ी धूप में प्रवासी मजदूरों के दर्द को बांंटने का जिम्मेदारी ली है। 

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