जांच कमेटी:कंबल की खरीदारी घोटाला मामले में तत्कालीन सीईओ रेणु गोपीनाथ ने संलिप्तता सेे किया इनकार

जादूगोड़ा2 महीने पहले
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  • कंबल घोटाले में लीपापोती करने का प्रयास : रेणु

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारक्राफ्ट द्वारा कंबल की खरीदारी में बरती गई अनियमितता की जांच के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से जांच से संबंधित अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त करने और झारक्राफ्ट के दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए प्रबंध निदेशक, झारक्राफ्ट को निर्देश देने संबंधी प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है। ज्ञात हो कि झारक्राफ्ट के द्वारा हरियाणा के पानीपत से कंबल की खरीदारी की गई थी ।

इस मामले में आरोपी बनाए जाने पर जादूगोड़ा के यूसील काॅलोनी निवासी झारक्रॉफ्ट के पूर्व सीईओ रेणु गोपीनाथ पणिक्कर ने दैनिक भास्कर से अपना पक्ष रखतेे हुए बताया कि कंबल बनाने का काम झारक्राफ्ट में 2016 से चल रहा था, वह 1 साल बाद 6 अप्रैल 2017 को झारखंड के सीईओ पद पर अपना योगदान दी थी। एक साल बाद ही 2018 को इस पद से इस्तीफा दे दी थी। इस मामले से उसका कोई लेना देना नहीं है। यह काम पहले से ही झारखंड सरकार द्वारा करवाया जा रहा था।

उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के सीईओ एक ऐसा पद है जिसमें वहां के एमडी एवं बोर्ड के आदेश का पालन करना है। सीईओ को किसी भी वितीय लेन-देन में एक रूपए का भी अधिकार नहीं दिया गया है ना ही किसी चेक में साइन करने का अधिकार है। इसके बाद भी इस मामले में आरोपी बनाया जाना समझ सेे परे हैं। उन्होंने यह कहा कि एक दिन में तीन लाख कंबल बनाने का आरोप लगाया गया है जबकि सी बातें कहीं भी सामने नहीं आई है । यह एक मनगढ़ंत बात है।

उन्होंने यह भी बताया कि रघुवर सरकार में 27 लोगों की जो कमेटी जांच कमेटी बनी थी उसमें सब कुछ स्पष्ट कर दिया गया था। झारक्राफ्ट द्वारा इस 18 करोड के लेनदेन में एक भी रुपया किसी मजदूर को भुगतान नहीं किया गया है इसलिए उन्होंने इस पूरे मामले में ही कहा कि रघुवर सरकार द्वारा बड़े-बड़े घोटाले को छुपाने के लिए इस मामले को उजागर कर लीपापोती करने का प्रयास किया गया है जबकि कंबल में इसी प्रकार की घोटाला हुआ ही नहीं है।

यह है पूरा मामला : झारक्राफ्ट द्वारा हरियाणा के पानीपत से कंबल क्रय में हुई अनियमितता एवं आपूर्ति की गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव को जनवरी 2018 में जांच कराने को लेकर आवेदन दिया गया था । जिसके प्रसंग में उक्त तथ्यों की जांच के लिए तत्कालीन विकास आयुक्त के द्वारा विभागीय सचिव को निर्देश दिया गया था। इसके उपरांत महालेखाकार झारखंड से अनियमितता के संबंध में ऑडिट कराया गया । महालेखाकार कार्यालय द्वारा कंबल उत्पादन से लेकर कंबल आपूर्ति में हुई गड़बड़ियों को उजागर किया गया।

इसके बाद पूरे मामले की संयुक्त रूप से जांच कराई गई। झारक्राफ्ट के द्वारा 23 फरवरी 2018 को विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रेषित किया गया । इस विस्तृत जांच प्रतिवेदन में एनएचडीसी के पदाधिकारी, धागा आपूर्ति पदाधिकारी, ट्रांसपोर्टर, नसीम अख्तर, तत्कालीन उप महाप्रबंधक झारक्राफ्ट अशोक ठाकुर, मुख्य वित्त पदाधिकारी झारक्राफ्ट एवं रेणु गोपीनाथ पणिक्कर, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की अनियमितता में शामिल होने की संभावना बताई गई ।

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