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समझदार बनें, स्वार्थी नहीं:शहर के अस्पतालों में 1114 कोरोना मरीज भर्ती, 44 मरीज ऑक्सीजन लेवल ठीक होने पर भी नहीं छोड़ना चाह रहे बेड

जमशेदपुर21 घंटे पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • ये जिद दूसरों की जिंदगी पर पड़ सकती है भारी
  • जब मरीज पूरी तरह ठीक हो जाएंगे तो उन्हें डिस्चार्ज (छुट्टी) किया जाए

शहर के विभिन्न कोविड अस्पतालों में 1114 कोरोना मरीज भर्ती हैं। इनमें 731 मरीज ऑक्सीजन के सहारे हैं या फिर वेंटिलेशन पर। वहीं 44 मरीज ऐसे हैं, जिनका ऑक्सीजन लेवल ठीक हो चुका है, लेकिन वे बेड खाली नहीं कर रहे हैं। ऐसे मरीजों का कहना है- अगर दोबारा उनकी तबीयत खराब होती है तो वे कहां जाएंगे। इसलिए जब वे पूरी तरह ठीक हो जाएंगे तो उन्हें डिस्चार्ज (छुट्टी) किया जाए।

दूसरी ओर, कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि अस्पताल प्रबंधन इमरजेंसी में उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर ऑक्सीजन दे रहे हैं। इनको ध्यान में रखकर अब हर दिन अस्पतालों में एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम मरीजों की स्थिति के अनुसार उन्हें वेंटिलेटर, आईसीयू, सीसीयू या फिर नॉर्मल वार्ड में भेज रहे हैं, ताकि नए मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज हो सके।

जेनरल वार्ड में शिफ्ट करने की बात कहने पर बारीडीह के व्यक्ति ने किया विरोध

बारीडीह के एक व्यक्ति को 29 अप्रैल को सांस लेने में परेशानी होने के बाद एमजीएम अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन के साथ आवश्यक इलाज किया तो एक मई की शाम में स्थिति सामान्य हो गई। दो मई को डॉक्टर ने मरीज को जेनरल वार्ड में शिफ्ट करने को कहा तो मरीज ने विरोध किया। मरीज ने कहा- अगर दोबारा ऐसी नौबत आ गई और उस समय ऑक्सीजन बेड नहीं मिली तो वह कहां जाएगा। मामले की जानकारी होने पर अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ नकुल चौधरी ने मरीज को स्पष्ट किया- वार्ड में सिर्फ डॉक्टरों की चलेगी। इसलिए तत्काल शिफ्ट हो जाइए। डॉक्टरों की सख्ती के बाद मरीज मन मसोसकर जेनरल वार्ड में गया।

परिजनों ने अस्पताल की मेडिकल टीम पर मरीज से भेदभाव का आरोप लगाया

सांस लेने में दिक्कत होने पर सोनारी के रहने वाले एक व्यक्ति को परिजनों ने 30 अप्रैल की रात बिष्टुपुर स्थित कांतिलाल कोविड अस्पताल में एडमिट कराया। इलाज के बाद 3 मई को मरीज की स्थिति सामान्य हो गई। जांच करने के बाद डॉक्टरों ने मरीज को जेनरल वार्ड में शिफ्ट कर दूसरे गंभीर मरीज को ऑक्सीजन बेड देना चाहा तो मरीज व उसके परिजन विरोध करने लगे। उन्होंने डॉक्टरों पर भेदभाव कर मरीज को ऑक्सीजन बेड से हटाने का आरोप लगाया। हालांकि डॉक्टरों ने दूसरे मरीज की गंभीर स्थिति को देख सामान्य हो चुके मरीज को जेनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया।

ठीक होने पर दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने पर परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा

सदर अस्पताल (जमशेदपुर) में 28 अप्रैल की सुबह 9.40 बजे परसुडीह के रहने वाले एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने की समस्या होने पर एडमिट किया गया। डॉक्टरों के लगातार प्रयास के बाद तीन दिन में मरीज की स्थिति सामान्य हो गई। डॉक्टरों ने उक्त मरीज को जेनरल वार्ड में शिफ्ट कर दूसरे गंभीर मरीज को ऑक्सीजन बेड पर एडमिट करने की प्रक्रिया शुरू की तो मरीज के परिजन हंगामा करने लगे। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ बाखला ने परिजनों को समझाया- सामान्य हो चुके मरीज को ऑक्सीजन बेड पर रखा जाएगा तो अन्य गंभीर मरीजों का इलाज कैसे होगा।

कुछ लोगों के कारण हो रही परेशानी, समझाने पर मान रहे

कुछ मरीज व उनके परिजन ऐसे हैं, जो ऑक्सीजन बेड या वेंटिलेटर मिलने पर चाह रहे हैं कि मरीज पूरी तरह ठीक होकर ही बेड से हटे। लेकिन वर्तमान स्थिति में यह संभव नहीं है। हालांकि समझाने के बाद ऐसे मरीज व उनके परिजन समझ रहे हैं।

-डाॅ नकुल चौधरी, एमजीएम अस्पताल के उपाधीक्षक

हर अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि जो मरीज ठीक हैं उन्हें अस्पताल से छुट्टी दिया जाए ताकि नए संक्रमितों का बेहतर इलाज हो सके। ठीक हो चुके मरीजों को उनकी तसल्ली के लिए अस्पताल में नहीं रखा जा सकता है।
-डॉ एके लाल, सिविल सर्जन

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