भास्कर एक्सक्लूसिव:दाे साल में 39 उद्याेगपतियाें ने ईएमसी में ली जमीन, फैक्ट्री एक ने भी नहीं लगाई

जमशेदपुर3 महीने पहलेलेखक: पवन मिश्र/ राेहित सिंह
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आदित्यपुर में ईएमसी का निर्माण पूरा हो चुका है। - Dainik Bhaskar
आदित्यपुर में ईएमसी का निर्माण पूरा हो चुका है।

आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में राज्य के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) का निर्माण पूरा हुए करीब दाे साल से अधिक समय हाे गए, लेकिन अभी यहां एक भी कंपनी ने अपना प्राेडक्शन शुरू नहीं किया है। यहां 39 कंपनियाें ने फैक्ट्री लगाने के लिए प्लॉट एलाॅट कराया है।

लेकिन दाे कंपनियाें काे छाेड़ शेष कंपनियाें ने प्लांट निर्माण का काम भी नहीं शुरू किया है। यही वजह है कि यहां एक भी व्यक्ति के लिए राेजगार सृजन हुआ, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने में अब तक करीब 110 करोड़ रुपए खर्च हो चुके।

दो साल इंतजार करने के बाद जियाडा ने अब उन कंपनियाें के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है जिन्हाेंने प्लॉट ताे ले लिया लेकिन अपना प्राेजेक्ट नहीं लगा रही हैं। पहले चरण में जिन 9 कंपनियाें को प्लॉट का आवंटन हुआ था और उन्होंने कोई काम नहीं किया, उन्हें शाेकाॅज नाेटिस जारी किया गया है।

उनसे पूछा गया है कि प्राेजेक्ट लगाने में देरी की वजह से क्याें न प्लॉट का एलाॅटमेंट रद्द कर दिया जाए। ईएमसी क्षेत्र में कुल 52 प्लॉट हैं। पहले छह चरण में कुल 32 प्लॉट का आंवटन अलग- अलग उद्याेगपतियाें काे किया गया। इसके बाद जियाडा ने 10 प्लॉट के आवंटन के लिए सातवें चरण की प्रक्रिया शुरू की और उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए एक एकड़ प्लॉट की कीमत 9368172 रुपए से घटाकर 4684086 रुपए प्रति एकड़ किया। इसके बाद सिर्फ 7 प्लॉट का ही आवंटन हाे पाया।

15 हजार लाेगाें काे राेजगार देने की थी याेजना, एक को भी नहीं मिला

क्या है ईएमसी परियाेजना

सरकार की याेजना के तहत ईएमसी में करोड़ों के निवेश के साथ आदित्यपुर में औद्योगिक विस्तार को नया मुकाम देना था। ईएमसी में इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े उद्योग लगने थे। इसके लिए जमीन का आवंटन किया जा चुका है। इसमें एलइडी बल्ब, एलइडी टीवी, मोबाइल के पार्ट्स, गाड़ियों में लगने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम तैयार हाेने थे।

परियाेजना एक नजर में

  • 83 एकड़ जमीन पर बना है इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर।
  • प्राेजेक्ट पर 110 कराेड़ खर्च हो चुके हैं।
  • 2100 करोड़ का इन्वेस्टमेंट आने का अनुमान था।
  • 52 कंपनियों के लिए ईएमसी परिसर में प्लॉटिंग तैयार
  • 15 हजार लाेगाें काे राेजगार उपलब्ध कराने का था लक्ष्य
  • सीएम हेमंत साेरेन ने 2020 में किया था ईएमसी का उद्घाटन।

छह चरणाें में इन कंपनियाें ने बुक कराया है प्लॉट

संधु टेक्नाे कार्ट्स लिमिटेड, गाेबाेस हाेल्डिंग्स, अजंता रीफाेस्टेल कमिकल्स, राेजा टेक्नाेलाॅजी, बीएसए कार्पाेरेशन, हाेपला सस्टेनिबिलिटी शाल्यूशन, एपी इलेक्ट्राे मैक्स, स्मार्ट इनफाेकाॅम, बीएस इंटर प्राईजेस, भालाेटिया मैटकाेक, एसीई पाॅवर इलेक्ट्राॅनिक्स, इस्टर्न एजेंसिस, मीडिया मैजिक, श्री गणेश इलेक्ट्रिकल्स एंड इलेक्ट्राॅनिक्स, कुहू लैब्स प्राईवेट लिमिटेड, सुभा इनफाेटेक, ग्रीन विजन, शिव शक्ति कार्पाेरेशन, एमएस बाबा श्यान इलेक्ट्राॅनिक्स, आरएएच इलेक्ट्राॅनिक्स, इवेस्ट रिसाईकीलर्स एलएलपी, श्री सहजानंदास ऑटाेमेक्स, सचदेव साेलर इलेक्ट्रिकल्स, साईनेर्जी इंटर प्राईजेज, टीटू रियलिटी शाॅल्यूशन, डीजी एलेक्ट्राे, धनुका केमिकल्स इंडस्ट्रीज, आनंद यूटिलाईट्स, एलीड इस्ट्रूमेंट्स एंड थेराेमाेकाेपल्स, ग्रीन वर्ल्ड माेटर्स, सीटीसी प्रेजेसीएन टूल्स, इएलएएन।

इन कंपनियाें से प्लॉट वापस लेने की तैयारी: संधु टेक्नाेकार्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, गाेबाेस हाेल्डिंग्स लिमिटेड, बीएसए कॉर्पाेरेशन लिमिटेड, एपी इलेक्ट्राे मैक्स, भालाेटिया मैटकाेक प्राइवेट लिमिटेड, शुुभा इनफाेटेक, शिव शक्ति कॉर्पाेरेशन, साईनेग्री इंटरप्राइजेज, धनुका केमिकल्स इंडस्ट्रीज।

एक्सपर्ट व्यू:इलेक्टॉनिक पार्ट्स की असेंबलिंग कंपनियां राज्य में नहीं, इसलिए दिक्कत

एलइडी टीवी, मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की असेंबलिंग कंपनी जमशेदपुर या झारखंड में नहीं हाेने की वजह से इस स्केल के उद्याेगपति यहां इंडस्ट्री लगाना नहीं चाहते हैं। गाड़ियों में लगने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम तैयार करने वाली कंपनियां पहले ही आदित्यपुर क्षेत्र में काफी हैं।

ऐसे में वे अपने मूल जगह काे छाेड़ कर ईएमसी में शिफ्ट नहीं होना चाहते। स्माल इंस्ट्री के लिए जिस प्रकार के स्किल की जरूरत है उस प्रकार के स्किल वर्कर्स यहां नहीं हैं। इसलिए भी कंपनियां नहीं आना चाह रही हैं।

सीधी बात प्रेमरंजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, जियाडा :कोरोना के कारण नहीं आ रही थीं कंपनियां

Q. करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी किसी कंपनी ने अपनी मैनुफैक्चरिंग नहीं शुरू की है, यह प्राेजेक्ट फेल हो चुका है?

A. यह हमारे लिए चिंता का विषय है। इसलिए हम ऐसी कंपनियाें काे चिन्हित कर रहे, जिन्हाेंने प्लांट लगाने के नाम पर प्लॉट लिया है। लेकिन वे प्लांट नहीं लगा रही है। ऐसी 9 कंपनियाें काे चिन्हित कर शाेकाॅज जारी किया गया है। अगर इनका रवैया ऐसा ही रहा ताे इनसे प्लॉट लेकर दूसरे काे दिया जाएगा।

Q क्या वजह है कि उम्मीद के अनुसार यहां कंपनियां नहीं आईं?

A.इसके कई कारण हैं। सबसे प्रमुख काेराना रहा। जैसे ही प्लॉट आवंटित किया गया काराेना का असर बढ़ने लगा। इसका असर औद्याेगिक क्षेत्र में देखने काे मिला। अब इसका असर कम हाे गया है ऐसे में कंपनियाें काे अपने प्राेजेक्ट के निर्माण में तेजी लाने काे कहा गया है।​​​​​​​