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अनुष्ठान:19 साल बाद तिथियों का दुर्लभ संयोग, भगवान विश्वकर्मा की पूजा, महालय अमावस्या और तर्पण का समापन 17 सितंबर को

जमशेदपुर16 दिन पहले
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  • 1982 व 2001 में भी हुआ था एक साथ अायाेजन, 17 अक्टूबर से शुरू होगी दुर्गा पूजा

शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को हाेगी। सुबह 10.19 बजे सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। इस दिन शाम 4.55 बजे तक अमावस्या है, जिसके बाद से पुरुषोत्तम मास शुरू हो जाएगा। इस साल तिथियों का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। जब विश्वकर्मा पूजा और महालया अमावस्या एक साथ 17 सितंबर को होगी। वहीं, महालय के दिन पितृ तर्पण समाप्त होगा। इसलिए इस साल होने वाली दुर्गा पूजा कुछ अलग हाेगी।

अमूमन महालया पूजा के दूसरे दिन पितर तर्पण के बाद से मां दुर्गा पाठ की शुरुआत हो जाती है, लेकिन इस साल महालया पूजा के पूरे एक माह बाद 17 अक्टूबर से दुर्गा पूजा की शुरुआत होगी और विजयादशमी 26 अक्टूबर को होगा। ज्योतिषाचार्य की मानें तो इस वर्ष हिन्दू शास्त्रों में दुर्गा पूजा आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में हाेगी। इस बार दो अश्विन माह होंगे- एक शुद्ध तो दूसरा पुरुषोत्तम यानी अधिक मास।

ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश कुमार उपाध्याय शास्त्री ने बताया कि महालया अमावस्या इस साल 16 सितंबर की शाम 7.05 से 17 सितंबर की शाम 5.04 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 17 सितंबर को महालया पूजा होगी। वर्ष 1982, 2001 के बाद अब 2020 में पितृपक्ष 17 सितंबर को तर्पण के साथ खत्म होगा।

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