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छात्राओं की नाैकरी पर संकट:6 हजार छात्राओं की डिग्री अटकी क्योंकि, नियम के बावजूद प्रोवीसी हस्ताक्षर नहीं कर रहे

जमशेदपुर2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रोवीसी डाॅ. अरुण सिन्हा का गैरजिम्मेदाराना रवैया
  • केयू में पहली बार एेसा; जब डिग्रियाें काे कार्यकाल का हवाला देकर राेका गया

जमशेदपुर वीमेंस काॅलेज की ग्रेजुएशन पासआउट करीब 6 हजार छात्राओं काे डिग्री नहीं मिली है। क्याेंकि इनपर प्रोवीसी डाॅ. अरुण कुमार सिन्हा ने दस्तखत नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि डिग्रियां मेरे कार्यभार संभालने से पहले की हैं। मुझसे पहले के प्राेवीसी काे हस्ताक्षर करना चाहिए। सिन्हा के पहले के प्रोवीसी रिटायर हो चुके हैं।

केयू में पहली बार ऐसा है, जब डिग्रियाें काे कार्यकाल का हवाला देकर राेक दिया गया है। जबकि इसके पहले के प्राेवीसी अपने कार्यकाल के पहले की डिग्रियाें पर साइन करते रहे हैं। ग्रेजुएशन की डिग्री पर प्रोवीसी और पीजी की डिग्री पर वीसी दस्तखत करते हैं। वीसी पीजी की डिग्रियों पर दस्तखत कर रहे हैं। प्रोवीसी की इस हरकत के कारण वैसी छात्राएं ज्यादा परेशान हैं जाे नाैकरी कर रही हैं, या फिर करने वाली हैं। कंपनियां छात्राओं से डिग्री मांग रही हैं।

सत्र 2015 से लेकर 2017 तक की रुकीं हैं डिग्रियां

जिन डिग्रियों पर साइन होने हैं वे सत्र 2015-17 की हैंं। उस समय डाॅ. रंजीत प्रसाद सिंह प्राेवीसी थे। लेकिन तत्कालीन प्रिंसिपल ने डिग्रियाें काे जारी करने का प्रस्ताव केयू काे नहीं भेजा। 2020 में डाॅ. शुक्ला माेहंती काॅलेज की प्रिंसिपल बनी व डिग्रियाें पर हस्ताक्षर कर उसे जारी करने के लिए विवि काे भेजा। उससे पहले ही प्राेवीसी रंजीत कुमार सिंह रिटायर हो चुके थे।

100 से अधिक डिग्रियों पर साइन कर चुके हैं डाॅ. सिन्हा

प्राेवीसी डाॅ. सिन्हा ने 2015-17 की 100 से अधिक छात्राओं की डिग्री पर साइन किया है। इन छात्राओं काे पिछले वर्ष काॅलेज के दीक्षांत समाराेह में बुलाया गया था। इसमें प्राेवीसी अतिथि थे। लेकिन उसके बाद जब अन्य छात्राओं की डिग्री उनके पास भेजी ताे साइन करने से इनकार कर दिया। दरअसल, विश्वविद्यालय में चल रही आंतरिक खींचतान के कारण ऐसा हो रहा है।

ये है वीमेंस काॅलेज में डिग्री जारी करने का नियम

जमशेदपुर वीमेंस काॅलेज ऑटाेनाेमस है। यहां काॅलेज ही डिग्री छपवाता है और प्रिंसिपल व परीक्षा नियंत्रक साइन कर विश्वविद्यालय काे भेजते हैं। अगर डिग्री यूजी की है, ताे उस पर प्राेवीसी व पीजी की है ताे वीसी हस्ताक्षर करते हैं। इसमें विवि के परीक्षा नियंत्रक का हस्ताक्षर नहीं हाेता है। जबकि प्रोवीसी सिन्हा चाहते हैं कि डिग्री में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक साइन करें, जो पूरी तरह गलत है।

छात्राओं की फंस सकती है नाैकरी

मैं 2017 में पास आउट हुई। मैं काेलकाता में निजी कंपनी में काम करती हूं। कंपनी ने डिग्री मांगी है। प्राेवीसी के दस्तखत नहीं करने से मुझे डिग्री नहीं मिली।

-सुमन कुमारी, छात्रा

डिग्री के लिए विवि काे पत्र भेजा

​​​​​​​सत्र 2015-18 के बीच पास आउट छात्राओं ने डिग्री के लिए आवेदन किया है। डिग्रियाें काे जल्द जारी करने के लिए अनुराेध पत्र भेजा है।
-डाॅ. शुक्ला माेहंती, प्रिंसिपल, वीमेंस काॅलेज

परीक्षा नियंत्रक के करते ही करूंगा

ये डिग्री जिस अवधि की हैं, वो मेरे ज्वाइनिंग से पहले की है। परीक्षा नियंत्रक काे हस्ताक्षर करने काे कहा है। वो जैसे ही हस्ताक्षर करेंगे, मैं भी कर दूंगा।

-डाॅ. अरुण कुमार सिन्हा, प्राेवीसी, केयू

मैं खुद इसे देख रहा हूं, हाेगा समाधान

मामला हमारे संज्ञान में आया है। मैं खुद इसे देख रहा हूं। आंतरिक वजहाें से डिग्री जारी हाेने में देरी हुई। छात्राओं काे परेशान नहीं हाेना पड़ेगा। समाधान जल्द हाेगा।

ओं- प्राे. गंगाधर पांडा, कुलपति, केयू

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