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स्मृतिशेष:दोस्तों संग बेहद खुशमिजाजी से पेश आते थे दिलीप साहब, हंसते-हंसते लतीफे सुनाते थे

जमशेदपुर20 दिन पहले
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दिलीप-सायरा बानो के साथ सिकंदर व उनकी पत्नी। - Dainik Bhaskar
दिलीप-सायरा बानो के साथ सिकंदर व उनकी पत्नी।
  • धातकीडीह निवासी सिकंदर हयात खान तीन बार दिलीप कुमार से मिले थे
  • बकौल सिकंदर, दिलीप साहब बेहद आर्कषक व्यक्तित्व के मालिक थे

हमेशा संजीदा रहने वाले दिलीप कुमार उर्फ युसूफ खान दोस्तों के साथ बेहद खुशमिजाजी से मिलते थे। हंसते-हंसते लतीफे सुनाते थे। यह कहना है दिलीप कुमार से अलग-अलग अवसरों पर 3 बार मिल चुके शहर के धातकीडीह निवासी सिकंदर हयात खान का। करीम सिटी काॅलेज के मॉस कम्युनिकेशन विभाग में लैब इंचार्ज सिकंदर हयात खान ने दिलीप कुमार से क्रमश: 1981, 2011 और 2019 में मुंबई में उनके आवास पर मुलाकात की थी।

बकौल सिकंदर, दिलीप साहब बेहद आर्कषक व्यक्तित्व के मालिक थे। वे नाप तौलकर व संजीदगी से बात करते थे, पर दोस्तों के साथ खुलकर मिलते थे। इतनी बड़ी हस्ती होने के बावजूद उनमें जरा भी गुरूर नहीं था। तीन बार हुई मुलाकात में हर बार मुझे अपनापन का एहसास हुआ। अंतिम बार मैं पत्नी इशरत के साथ मिला था। बीमार होने के बावजूद दिलीप साहब ने मेरे साथ फोटो खिंचवाई और हालचाल पूछा। दिलीप कुमार से मुलाकात कराने में उनकी पत्नी सायरा बानो का बड़ा हाथ रहता था।

जमशेदपुर आने की बहुत इच्छा थी

दिलीप कुमार रांची में पहली बार बीमार दोस्त अवतार कृष्ण अग्रवाल को देखने आए थे। उसके बाद 4 मार्च 1984 को डालटेनगंज में दिलीप कुमार नाइट में बतौर अतिथि आए थे। तब उन्होंने जमशेदपुर आने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से नहीं आ पाए थे।

कार्यक्रम के बाद बेतला में बिताई रात

दिलीप कुमार नाइट के दौरान चियांकी में उन्होंने पलामू की नैसर्गिक खूबसूरती की तारीफ करते हुए इसकी तुलना ‘इंद्रधनुष’(कौस ए कुज़ह) से की थी। दिलीप कुमार बेतला भी गए। वहां उन्होंने एक रात गुजारी थी। दूसरे दिन वे मुंबई रवाना हुए।

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