ऐसे में कैसे पाएंगे लक्ष्य:दिसंबर में रोज 1365 को पहली डोज, इस रफ्तार से 151 दिन में 100% टीकाकरण

जमशेदपुरएक महीने पहले
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  • झारखंड में शत-प्रतिशत टीके के लिए सीएम ने दी 40 दिन की मोहलत
  • ओमिक्राॅन से बचाव के लिए वैक्सीनेशन बढ़ाने का दिया था निर्देश
  • जिले में 87.78% लोगों को पहली, 54.31% को लगी है दूसरी डोज

कोविड संक्रमण की वर्तमान स्थिति को लेकर 9 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्च स्तरीय बैठक की थी। सीएम ने 40 दिन (20 जनवरी 2022) तक 100% आबादी के वैक्सीनेशन का आदेश दिया। लेकिन झारखंड में वैक्सीनेशन की जो रफ्तार है, उससे 100 फीसदी आबादी को पहली डोज लगाने में ही 130 दिन लगेंगे। पूर्वी सिंहभूम की बात करें तो पूरे राज्य में सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन यहीं हुआ है। लेकिन दिसंबर में पहली डोज लेने के लिए जितने लोग आ रहे हैं, उसके हिसाब से 100 फीसदी टारगेट पाने में 151 दिन लग जाएंगे।

इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग के पास टीकाकरण के लिए कोई खास मैकेनिज्म नहीं होना है। 16 दिसंबर को देश में कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन शुरू हुए 11 महीने पूरे हो जाएंगे। सोमवार तक झारखंड में 71.85% (पूर्वी सिंहभूम में 87.78) आबादी को पहली डोज ही लगाई जा सकी है। राज्य में करीब 2 करोड़ 41 लाख 21 हजार लोगों को वैक्सीनेट करना है।

राज्य में औसतन 52 हजार लोगाें को पहली डोज

राज्य में पिछले 5 दिन में वैक्सीनेशन की रफ्तार देखें तो मुश्किल से रोजाना 52 हजार लोगों को ही पहली डोज लग रही है। लोग न तो वैक्सीनेशन के लिए रूचि दिखा रहे हैं और न ही प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग इसके लिए सख्त है। सरकार के आदेशानुसार, 20 जनवरी तक लक्ष्य पाने के लिए रोजाना 178458 लोगों को फर्स्ट डोज लगाना होगा।

वैक्सीनेशन में पीछे रहने के 5 प्रमुख कारण, जब तक प्लानिंग नहीं होगी, रफ्तार सुस्त पड़ी रहेगी

  • कारण... दूसरे राज्यों की तुलना में डोज शुरू से ही कम दिए गए।
  • उपाय.. अब मिल रहा है और बढ़ना चाहिए।
  • कारण... अभी डोज उपलब्ध हैं, लेकिन लोग ले नहीं रहे हैं।
  • उपाय.. कड़ाई हो तो लोग आगे आ सकते हैं।
  • कारण... वैसे काफी लोग हैं, जिनकी दूसरी डोज पेंडिंग है।
  • उपाय.. प्रशासन ऐसे लोगों को ट्रेस करे।
  • कारण... वैक्सीनेशन बढ़ाने के लिए अभी तक कोई रोडमैप नहीं है।
  • उपाय.. विभाग तुरंत रोडमैप जिलों को सौंपे।
  • कारण... वैक्सीनेशन को लेकर काफी लोगों में अब भी संदेह है।
  • उपाय.. जागरूकता अभियान चलना चाहिए।
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