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  • If More Than 125 Ventilators Are Needed, Then Expensive Private Hospitals Will Have To Face Them, There Is Also A Shortage Of Doctors And Staff.

तैयारियों का एक पहलू यह भी:125 से ज्यादा वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी तो फिर महंगे निजी अस्पतालों का मुंह ताकना पड़ेगा, डॉक्टर-स्टाफ की भी कमी

जमशेदपुरएक महीने पहले
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  • जमशेदपुर में ऑक्सीजनयुक्त बेड व वेंटिलेटर पहले से बढ़े लेकिन उम्मीद से कम, सात नए प्लांट शुरू, नहीं होगी आक्सीजन की कमी

कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के लगातार बढ़ने से जमशेदपुर में थर्ड वेव शुरू होती है तो शहरवासियों को सेकेंड वेव की तरह ही बेड, वेंटिलेटर व डॉक्टर के लिए भटकना पड़ सकता है। सेकेंड वेव के दौरान हुई परेशानी के बाद सरकार की ओर से थर्ड वेव के लिए जो तैयारी की गई है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के सामान है। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी व निजी अस्पतालों को मिलाकर करीब 3000 बेड तैयार किए गए हैं।

एमजीएम, सदर अस्पताल समेत जिले के सात अन्य अस्पतालों में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है जो बेहतर ढंग से चल रहा है। लेकिन सरकार की ओर से डॉक्टर्स व पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है। इससे मरीजों के इलाज में दिक्कत आएगी। जिला स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर्स व पारा मेडिकल स्टाफ के करीब 61 फीसदी पद खाली हैं। ऐसे में मरीजों का समुचित इलाज होने की संभावना कम है।

ग्रामीण क्षेत्रों के मुख्यालय में भी संक्रमितों का हो सकेगा इलाज

जिले में 3000 कोरोना मरीजों के लिए बेड तैयार किए गए हैं। जहां तक मैन पॉवर का सवाल है, इसे दूर करने की प्रक्रिया चल रही है। इस बार जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मुख्यालय में भी कोरोना संक्रमितों के इलाज की व्यवस्था की गई है। -डॉ एके लाल, सिविल सर्जन

ग्रामीण क्षेत्रों के मुख्यालय में भी संक्रमितों का हो सकेगा इलाज

तीसरी लहर को लेकर फिलहाल जो तैयारी है, उसमें करीब 20 प्रतिशत और विस्तार के साथ कैंप हॉस्पिटल समेत अन्य विकल्पों को तैयार रखना चाहिए। दूसरी लहर के दौरान लोगों को काफी परेशानी हुई थी। इसे ध्यान में रखकर ही वर्तमान तैयारी करनी चाहिए। -डॉ जीसी माझी, अध्यक्ष, आईएमए जमशेदपुर

मेक शिफ्ट अस्पताल को अग्निशमन विभाग से नहीं मिली एनओसी

थर्ड वेव को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन की ओर से एमजीएम अस्पताल में 100 बेड का मेक शिफ्ट हॉस्पिटल बनाया गया है। इसमें 16 आईसीयू हैं, जहां बच्चे-बड़े सभी का इलाज होगा। इसके अलावा 34 ऑक्सीजन बेड व 50 नॉर्मल बेड हैं। हालांकि, इसे अग्निशमन विभाग की ओर से एनओसी नहीं मिली है।

इधर, मियाद खत्म होने पर 1.50 लाख ने नहीं ली दूसरी डोज​​​​​​​​​​​​​​

ऑमिक्रान का नाम सामने आने के बाद वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या थोड़ी बढ़ी है। लेकिन वैक्सीन लगवाने में लोग अब भी लापरवाही बरत रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड में वैक्सीनेशन में सबसे आगे चलने वाले पूर्वी सिंहभूम जिले में भी करीब 1.50 लाख लोगों ने दूसरी डोज समय सीमा खत्म होने के बावजूद नहीं ली है। इन लोगों को जागरूक करने के लिए एक्सएलआरआई के 20 विद्यार्थी प्लान तैयार कर रहे हैं। ​​​​​​​

वैक्सीनेशन सेंटर में 10 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति
उपायुक्त कार्यालय में बनाए गए वैक्सीनेशन कोषांग में 10 शिक्षकों को सोमवार को प्रतिनियुक्त किया गया है। ये दूसरी डोज नहीं लेने वालों से मोबाइल पर संपर्क कर वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करेंगे। जरूरत पड़ी तो मोबाइल वैन भेज कर घर टीका लगाया जाएगा। ​​​​​​​

चिन्हित किए गए लोगों को फोन पर संपर्क किया जाएगा

चिन्हित किए गए लोगों को फोन पर संपर्क कर दूसरी डोज लगवाने के लिए प्रेरित करेंगे। उनके मोबाइल पर मैसेज भेजा जाएगा। करीब 1.50 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्होंने मियाद पूरी होने के बाद भी दूसरी डोज नहीं ली है। - संदीप कुमार मीणा, एसडीओ ​​​​​​​

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