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  • In Tribal Society, The Status Of Women Is Higher Than That Of Men, In These Villages Women Are The Head Of The Family, Their Name On The Name Plate Of The House.

महिला समानता दिवस पर विशेष:आदिवासी समाज में महिलाओं का दर्जा पुरुषाें से ऊंचा, इन गांवों में परिवार की मुखिया महिलाएं, घर के नेम प्लेट पर इनका नाम

जमशेदपुर5 महीने पहलेलेखक: चंद्रशेखर सिंह/शंभू श्रवण
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  • जानिए उन महिलाओं काे, जिनके नाम से घर ही नहीं, इलाके की भी पहचान

हर साल 26 अगस्त काे हम महिला समानता दिवस के रूप में मनाते हैं। कानून की नजर में महिला-पुरुष काे बराबर का अधिकार मिला हुआ है, पर समाज में अभी भी महिलाओं काे लेकर दाेहरी मानसिकता दिखती है। उन्हें घर में भी अगुवा की भूमिका निभाने का माैका नहीं मिलता। सारे फैसले पुरुष ही करते हैं, लेकिन जमशेदपुर और आसपास के आदिवासी इलाकाें में महिलाओं का दर्जा पुरुषाें से भी ऊंचा है।

यहां परिवार की मुखिया महिलाएं हाेती हैं। महिलाओं के नाम पर ही घर पर नेम प्लेट लगाया जाता है। समाज में पुरुषाें के नहीं, महिलाओं के नाम से ही परिवार का परिचय हाेता है। इन गांवाें की मुखिया से लेकर पंचायत समिति सदस्य तक महिलाएं हैं। लाेग न्याय के लिए भी इन्हीं महिलाओं के पास पहुंचते हैं।

समान अधिकार के लिए आवाज बुलंद करनी हाेगी
नीनू कुदादा घर के साथ उत्तर-पश्चिम बागबेड़ा की भी मुखिया हैं। नीनू कहती हैं- मुझ जैसी कई महिलाओं ने समाज में अलग पहचान बनाई हैं। समान अधिकार की आवाज बुलंद करनी हाेगी।

आदिवासी ही नहीं, हर वर्ग की महिलाओ ंकाे आगे आना हाेगा
उत्तरी बागबेड़ा के एक घर पर गाैरी टाेप्पाे का नेम प्लेट लगा है। वह अपने पंचायत की मुखिया भी हैं। गाैरी कहती हैं- आदिवासी ही नहीं, हर वर्ग की महिलाएं आगे आएं ताे समाज विकसित हाेगा।

घर के अलावा पूरे इलाके की भी मुझसे हाेती है पहचान
दक्षिण सुसनिगढ़िया में एक घर पर बबीता करुवा का नेम प्लेट लगा है। उनके घर की पहचान उनसे ही है। पंचायत समिति की सदस्य भी हैं। कहती हैं- महिलाएं अपने अधिकार के लिए खुद आगे आएं।

महिलाएं झिझक छाेडें, समान अधिकार जरूर मिलेगा
प्रभा हांसदा पूर्वी घाघीडीह में रहती हैं। घर के बाहर नेम प्लेट भी उन्हीं का लगा है। पंचायत समिति सदस्य प्रभा कहती हैं-महिलाएं झिझक ताेड़ें तो समान अवसर जरूर मिलेगा।

इसलिए मनाया जाता है महिला समानता दिवस

अमेरिका में महिलाओ ंकाे वाेट देने का अधिकार नहीं था। महिलाओं के मताधिकार के लिए वहां गृह युद्ध से पहले आंदाेलन शुरू हुआ। करीब 50 साल की लड़ाई के बाद अमेरिका में 26 अगस्त 1920 काे 19वें संविधान संशाेधन के जरिए महिलाओं काे मतदान का अधिकार मिला। इसके साथ ही महिलाओं काे समानता का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष करने वाली महिला वकील बेल्ला अब्जुग के प्रयास से 1971 से 26 अगस्त काे महिला समानता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

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