तकनीक का इस्तेमाल:जीआईएस सिस्टम से जेएनएसी को शहर की हर सड़क और बिल्डिंग की जानकारी एक क्लिक पर मिलेगी

जमशेदपुर4 महीने पहले
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13000 कंक्रीट की सड़कें हैं। - Dainik Bhaskar
13000 कंक्रीट की सड़कें हैं।
  • शहर की हर कच्ची और पक्की सड़कों की स्थिति का पता लगा सकेंगे जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र के अधिकारी

जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र का जियोग्रफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इससे शहर के विकास में आसानी होगी। इस सिस्टम के जरिए जमशेदपुर में सड़कों की स्थिति और कच्ची सड़कों की स्थिति का पता लगाने में सफलता मिलेगी। शहर की जमीन की स्थिति का पता चलेगा। इसके माध्यम से शहर में बिल्डिंग और लोकेशन की भी जानकारी कंप्यूटर के जरिए हासिल किया जा सकेगा।

जीआईएस सिस्टम से पता चला है कि जमशेदपुर अक्षेस इलाके में 19952 छोटी बड़ी सड़कें हैं, जिसकी स्थिति का पता एक क्लिक में अधिकारी लगा सकते हैं। जहां भी कच्ची सड़क होगी उसको पक्की की जा सकेगी। अक्षेस कार्यालय सभागार में बुधवार को जीआईएस के संवेदक सुपीरियर ग्लोबल इंफ्रा स्ट्रक्चर के प्रतिनिधियों ने विस्तारपूर्वक सभी बिंदु को सॉफ्टवेयर के माध्यम से दिखाया। बैठक में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के विशेष पदाधिकारी संजय कुमार, आदित्यपुर नगर निगम के नगर आयुक्त गिरिजा शंकर, मानगो नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव, जुगसलाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जगदीश यादव मौजूद थे। बैठक में संवेदक को सभी प्लॉट का मौजा नंबर, थाना नंबर, खाता नंबर, प्लॉट नंबर, यूटिलिटी मैपिंग और जोनल प्लान बनाने का निर्देश संवेदक को दिया गया।

जीआईएस से जमशेदपुर के बारे में ये जानकारी मिली

  • 57.48 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल जमशेदपुर अक्षेस का।
  • 19952 सड़कें हैं जेएनएसी में।
  • 952 कच्ची और पेवर्स ब्लॉक जैसी सड़कें हैं शहर में।
  • 6000 कालीकृत सड़कें हैं।

यह होंगे फायदे

  • शहर का मास्टर प्लान बनाने में मदद मिलेगी।
  • विकास के लिए निर्णय शीघ्र लिए जा सकेंगे।
  • जमीनी सुविधाओं की मैपिंग से विकास एजेंसियों को काम करने में आसानी होगी।
  • नक्शा पास करने में दिक्कत नहीं होगी।
  • क्षेत्रों का निर्धारण, प्रॉपर्टी की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
  • सड़कों और रास्तों की स्थिति का पता चलेगा।
  • कच्ची सड़कों की पहचान हो सकेगी उसको पक्का किया जा सकेगा।

जीआईएस का प्रेजेंटेशन दिया है। कुछ खामियां इसमें पता चला है जिसको देखते हुए जीआईएस बनाने वाली कंपनी को कहा गया है कि इस वर्ष के आंकड़े के साथ नया प्रारूप तैयार करें। इस सिस्टम के लागू होने से विकास और नक्शा पारित करने का काम आसानी से हो सकेगा। -संजय कुमार, विशेष पदाधिकारी, जमशेदपुर अक्षेस।

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