पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पूर्वी सिंहभूम के शहरी क्षेत्र में कोरोना बरपा रहा कहर:4 प्रखंडों में 500 से कम मरीज, क्योंकि वहां प्रदूषण कम; जीवनशैली संयमित

जमशेदपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • जमशेदपुर और इसके आसपास के जिले औद्योगिक क्षेत्र

मिनी मुंबई कहलाने वाला जमशेदपुर कोरोना के कहर से परेशान है। लगभग 12 लाख आबादी वाले इस शहर में फिलहाल 6144 कोरोना के एक्टिव मरीज हैं, जबकि पूर्वी सिंहभूम के शेष करीब 17 लाख आबादी (10 प्रखंड/ 8 सीएचसी) में 527 एक्टिव मरीज हंै। इस तरह जमशेदपुर के 196 लोगों में एक संक्रमित है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 3226 लोगों में एक संक्रमित है। कोरोना के सेकेंड वेव में 1 अप्रैल से अब तक जिले में 21646 नए मरीज मिले हैं। इसमें शहरी क्षेत्र में 19605 तथा 2041 ग्रामीण क्षेत्र के हैं।

ओवरऑल बात करें तो जिले के लगभग एक साल के कोरोना काल में अब तक 39834 मरीज मिले हैं, जिसमें 34791 शहरी क्षेत्र के हैं। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़े देखें तो 6 मई तक जिले में 768 कोरोना मरीजों की मौत हुई। इनमें शहरी क्षेत्र के 739 मरीज शामिल थे। गुरुवार को जिले में कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 6631 थी, जिसमें 6144 शहरी क्षेत्र के थे। कोरोना समेत अन्य स्वास्थ्य सेवा के बेहतर संचालन के लिए पूर्वी सिंहभूम जिले में नौ सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) हैं। इनमें आठ ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र में जुगसलाई सीएचसी है।

एक्सपर्ट का मानना है- शहरी जीवनशैली में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ठीक ढंग से नहीं होना तथा घर से बाहर रहना कोरोना संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण है। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का संक्रमित क्षेत्रों में आना-जाना नहीं के बराबर होना और सोशल डिस्टेंसिंग के कारण कोरोना का असर कम है। जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में कोरोना के कहर का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे कोरोना काल में अब तक जिले के 4 प्रखंडों (सीएचसी) में संक्रमित मरीजों की संख्या 500 भी पार नहीं हो सकी है। दो प्रखंड में यह आंकड़ा 700 और दो अन्य प्रखंडों में 1100 से कम है। डुमरिया पूर्वी सिंहभूम जिले का एकमात्र प्रखंड है जहां अब तक किसी कोरोना मरीज की मौत नहीं हुई है। अन्य सात ग्रामीण प्रखंडों में अधिकतम 6 कोरोना मरीजों की मौत हुई है।

24 घंटे 700 चिमनियों से होता है प्रदूषण

जमशेदपुर और इसके आसपास के जिले औद्योगिक क्षेत्र हैं। यहां छोटी-बड़ी कंपनियों के लगभग 700 चिमनियां 24 घंटे धुआं उगलती हैं। इसके चलते यहां प्रदूषण स्तर सामान्य से ज्यादा रहता है। खतरनाक धूल कण (आरएसपीएम) का स्तर सामान्य से दोगुना रहता है। ये हमारे सांसों के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़े को कमजोर करता है और सांस की समस्या होती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, सल्फर डायऑक्साइड व नाइट्रोजन डायऑक्साइड की मात्रा भी डेंजर लेवल पर रहता है।

खबरें और भी हैं...