स्वास्थ्य विभाग का कारनामा:ज्यादा पैसे लेने पर सेव लाइफ के संचालक जेल में उमा हॉस्पिटल प्रमुख को सिर्फ 10 हजार जुर्माना

जमशेदपुर5 महीने पहले
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  • एक समान मामले में दो निजी अस्पतालों पर अलग-अलग कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से कोरोना काल मेंं मरीजों से सरकार द्वारा निर्धारित दर से अधिक पैसे लेने के आरोपी उमा हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ ओमप्रकाश को मात्र 10 हजार रुपए जुर्माना देने पर क्लीन चिट मिल गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें शिकायतकर्ता को अस्पताल प्रबंधन द्वारा निर्धारित दर से ली गई अधिक राशि वापस करने और दोबारा ऐसी अनदेखी नहीं करने को भी कहा गया है।

फिलहाल डाॅ ओमप्रकाश द्वारा उमा हॉस्पिटल की जमशेदपुर यूनिट की कमान डॉ मिथलेश को सौंप दी गई है। इधर, डॉ ओमप्रकाश के खिलाफ लगभग ढाई महीने बाद हुई इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी संदेह के घेरे में हैं, क्योंकि उमा हॉस्पिटल के प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई के लिए रांची मुख्यालय से सख्त कार्रवाई के लिए दो बार रिमाइंडर भी आ चुका था। दूसरी ओर, इसी तरह के आरोप में आदित्यपुर स्थित 111 सेव लाइफ नर्सिंग होम के संचालक डॉ ओपी आनंद 23 मई 2021 से जेल में हैं।

मामला : 5 दिन के लिए 94970 रु. का बिल थमाया
उमा हॉस्पिटल द्वारा काशीडीह के एक कोरोना मरीज के इलाज के लिए पांच दिन में 94970 रुपए का बिल थमा दिया गया। मरीज के परिजनों ने किसी तरह बिल चुकता किया और इसकी शिकायत सिविल सर्जन डॉ एके लाल से की थी। इसके बाद सिविल सर्जन ने जांच टीम गठित कर रिपोर्ट तलब की थी। जांच टीम ने 24 मई को रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंपी, जिसमें आरोप सही पाया गया। सिविल सर्जन ने रिपोर्ट रांची मुख्यालय भेज दी। मुख्यालय ने सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। कार्रवाई नहीं होने पर दो रिमाइंडर भी भेजा।

उमा हॉस्पिटल मामले में पीडि़त ने अपनी शिकायत वापस ले ली, इस कारण विभागीय प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई

सिविल सर्जन डॉ. एके लाल से सीधी बात

भास्कर : कोरोना काल के दौरान उमा हॉस्पिटल पर सरकार द्वारा तय रेट से अधिक पैसा का आरोप लगा जिसकी जांच हुई थी। जांच रिपोर्ट 24 मई को टीम ने सौंप दिया तो क्या कार्रवाई हुई?

सीएस : जांच रिपोर्ट में आरोप सही होने की पुष्टि हुई है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हॉस्पिटल प्रमुख पर 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया और दोबारा ऐसी गलती नहीं करने का निर्देश दिया गया है।

भास्कर : रिपोर्ट मिलने के करीब ढाई महीने बाद भी विभाग द्वारा मात्र 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया है जबकि इसी तरह के मामले में पड़ोसी जिले के एक डॉक्टर को 48 घंटों के अंदर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया। इस मामले में कोई दबाव या फिर कुछ और है..?

सीएस : कार्रवाई से पूर्व विभागीय गाइडलाइन के साथ एक्सपर्ट से राय ली जाती है ताकि किसी तरह की चूक नहीं हो। विभागीय प्रावधानों के तहत ही 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसमें कहीं कोई दबाब नहीं था। जो कार्रवाई हुई है वह प्रावधानों के तहत हुआ है। जहां तक पड़ोसी जिले के नर्सिंग होम का सवाल है तो वहां का मामला अलग था। उमा हॉस्पिटल के मामले में शिकायतकर्ता द्वारा अपनी शिकायत वापस ले ली गई है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभागीय प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।

111 सेव लाइफ में अधिक राशि लेने पर संचालक को भेजा जेल
आदित्यपुर स्थित 111 सेव लाइफ हॉस्पिटल व मेडिट्रिना हॉस्पिटल में भी मरीजों के इलाज के एवज में अधिक राशि वसूली जा रही थी। इसे लेकर 111 सेव लाइफ हॉस्पिटल के संचालक डॉ ओपी आनंद को पुलिस ने जेल भेज दिया। मेडिट्रिना हॉस्पिटल के खिलाफ भी कार्रवाई हुई, लेकिन कुछ दिन बाद मामला सामान्य हो गया और हॉस्पिटल फिर से चलने लगा।

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