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इंफेक्शन कंट्रोल प्लान की भास्कर पड़ताल:वेंटिलेटर पर गए 831 में से 646 संक्रमितों की नहीं बच सकी जान

जमशेदपुरएक महीने पहले
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मृतकों में 511 की उम्र 60 वर्ष से अधिक, शेष 135 में अधेड़, युवा व किशोर - Dainik Bhaskar
मृतकों में 511 की उम्र 60 वर्ष से अधिक, शेष 135 में अधेड़, युवा व किशोर
  • एमजीएम, कांतिलाल समेत अन्य कोविड अस्पतालों में नियमत: वेंटिलेटर का ईटी पाइप, ऑक्सीजन प्वाइंट पर लगे ह्यूमिडिफायर को 6 घंटे में साफ करना चाहिए
  • लेकिन इसकी सफाई 24 घंटे में एक बार हो रही। इससे जुड़े अन्य तथ्यों को बताती भास्कर की रिपोर्ट

कोरोना की सेकंड वेव में जान बचाने के लिए सबसे अचूक मशीन वेंटीलेटर भी नाकाम रही है। एक अप्रैल से अबतक शहर के कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर पर गए 831 मरीजों में 646 की मौत हो गई, सिर्फ 185 मरीजों की जान बच सकी। यानी वेंटीलेटर पर गए मरीजों की मृत्युदर 78% रही है। यह जानकारी जिला सर्विलांस विभाग कार्यालय से मिली। वेंटिलेटर मिलने के बावजूद मरने वाले 646 मरीजों में 511 की उम्र 60 वर्ष से अधिक है। शेष 135 में अधेड़, युवा व किशोर शामिल हैं। कुल मृतकों में 196 महिलाएं यानी 30.34% है। सरकारी आकड़े के मुताबिक जमशेदपुर में 1 अप्रैल से अब तक 636 मरीजों की मौत हो चुकी है।

शनिवार को अस्पतालों के इंफेक्शन कंट्रोल प्लान की पड़ताल में पता चला कि सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों के आईसीयू, एचडीयू, ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड वार्ड में इंफेक्शन कंट्रोल गाइडलाइन का पालन ही नहीं हो रहा है। एमजीएम, कांतिलाल समेत शहर के कई कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर की ईटी पाइप, ऑक्सीजन प्वाइंटर पर लगे ह्यूमिडिफायर हर 6 घंटे में साफ करना चाहिए, लेकिन इसकी सफाई 24 घंटे में एक बार हो रही है। इसे जांचने वाली इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी ने 4 महीने से कोविड वार्ड, नॉन कोविड वॉर्ड में वायरल, बैक्टीरियल इंफेक्शन की जांच ही नहीं की। वेंटिलेटर की सफाई नहीं होने से मरीजों को दूसरी संक्रामक बीमारियों का भी खतरा बढ़ता है। हालांकि डॉक्टरों ने इससे इनकार किया है।

78% डेथ... 1 अप्रैल से 28 मई तक वेंटिलेटर मिलने पर भी सिर्फ 22 फीसदी मरीज घर लौट पाए

इंफेक्शन गाइडलाइन की पड़ताल कर रही कमेटी

जमशेदपुर कोरोना से हुई अधिक मौत की जांच करने वाली कमेटी के सदस्यों ने कहा - वेंटिलेटर के बावजूद अधिक मौत का कारण इंफेक्शन कंट्रोल गाइडलाइन का पालन नहीं करना है। जांच में इसे भी शामिल किया है।

ह्यूमिडिफायर की हर दिन सफाई होती है- अधीक्षक

ईटी ट्यूब-ह्यूमिडिफायर की रोज सफाई व सैनेटाइज के साथ उपयोग किया जा रहा है। पानी की जगह डिस्टिल वाटर का उपयोग किया जा रहा है ताकि इंफेक्शन न हो। खामी है तो मैं ठीक करवाता हूं।
-डॉ. संजय कुमार, अधीक्षक, एमजीएम

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