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आंशिक रूप से दृष्टिहीन आईआईएम ग्रैजुएट की पहल:दिव्यांगों को रोजगार दिलाने के लिए बनाया पोर्टल, 50 को मिला काम

जमशेदपुर4 महीने पहले
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लद्दाख में आयोजित एक साइकिलिंग इवेंट में टेंडम बाइक के साथ विनीत सरायवाला (दाएं)। - Dainik Bhaskar
लद्दाख में आयोजित एक साइकिलिंग इवेंट में टेंडम बाइक के साथ विनीत सरायवाला (दाएं)।

30 साल के विनीत सरायवाला आंशिक रूप से दृष्टिहीन हैं। एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा से ग्रसित हैं। इसमें नजर धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है। बीते साल जब लॉकडाउन के कारण लोगों की नौकरियां जा रही थीं, तो दिव्यांग भी इससे अछूते नहीं रहे।

कॉर्पोरेट दुनिया में साढ़े पांच साल बिता चुके और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़े विनीत के पास इस दौरान दिव्यांगों के रिज्यूम की संख्या अचानक बढ़ गई। विनीत ने महसूस किया कि वह अधिकतम चार-पांच लोगों की ही मदद कर सकते हैं, लेकिन बड़े स्तर पर मदद करने के लिए उन्हें संस्थागत रूप से काम करना होगा।

मार्च 2020 से उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांगों को समर्पित रोजगार पोर्टल पर काम करना शुरू कर दिया और दिसंबर 2020 में ‘एटिपिकल एडवांटेज’ (Atypical Advantage) शुरू किया। जमशेदपुर में रहने वाले विनीत बताते हैं कि उनका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगों को आर्थिक रूप से स्वतंत्रता देना है।

विनीत बताते हैं कि अपनी नौकरी के दौरान जब उन्हें दिव्यांग वॉइस ओवर आर्टिस्ट और मॉडल की जरूरत पड़ी, तो उन्हें खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। देश में दिव्यांगों को समर्पित ऐसा कोई खास माध्यम नहीं था, तब उन्हें इसका विचार आया। एटिपिकल एडवांटेज पूरी तरह योग्यता और हुनर पर आधारित पोर्टल है। इसमें 22 श्रेणियां- जैसे गायक, रचनात्मक लेखक, डांसर, वॉयस ओवर आर्टिस्ट, पेंटर आदि हैं। कोई भी यहां आकर अपनी जरूरत के हिसाब से लोगों को चुन सकता है।

विनीत बताते हैं कि प्लेटफॉर्म पर दिव्यांगों की खास योग्यता का जिक्र भर नहीं है, उनकी चुनौतियां और जीवनसंघर्ष की कहानी भी है। उनके पास अब तक 500 रिज्यूम आ चुके हैं और वे 50 लोगों को रोजगार दिला चुके हैं। पोर्टल के जरिए कई दिव्यांगों की पेंटिंग अमेरिका और यूरोप तक में बिक चुकी हैं। हाल ही में एमेजॉन के एक विज्ञापन में उनके एक दिव्यांग मॉडल को काम मिला है।

6 हाफ मैराथन, कई साइकिलिंग इवेंट में भी हिस्सा लिया

विनीत सरायवाला खुद को चुनौतियां देते रहते हैं। कहते हैं कि मैं पहले शर्मीला था और ज्यादा खेलकूद में हिस्सा नहीं लेता था। फिर मामा ने प्रेरणा दी, तो गाइड रनर के साथ दौड़ना शुरू किया। वह अब तक छह हाफ मैराथन दौड़ चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अल्ट्रा एंड्योरेंस साइकिलिंग रेस की है।

इसमें टेंडम बाइक (इसमें दो लोग पैडल मार सकते हैं) से पुणे से गोवा तक 270 किलोमीटर नॉन स्टॉप साइकिल चलाई थी। विनीत कहते हैं कि चूंकि वे गाड़ी नहीं चला सकते, ऐसे में दौड़ने और साइकिल चलाने में उन्हें स्वतंत्रता और उन्मुक्तता का अहसास होता है।

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