ज्येष्ठ मास में देवताओं का अभिषेक:जीवों की प्यास बुझाने से मिलता है अक्षय पुण्य; इसमें व्रत और पूजा की 12 तिथियां भी

जामताड़ाएक महीने पहले
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ज्येष्ठ महीना शुरू हो चुका है। इसमें गर्मी चरम पर रहती है। नौतपा भी इसी महीने में होता है। ज्येष्ठ में जलदान का उल्लेख पुराणों में है। एक ओर जहां प्याऊ खोलने और पक्षियों के लिए सकोरों में जल भरकर रखने से अक्षय पुण्य मिलता है।

वहीं, इस महीने में जल स्रोत सूखने लगते हैं, ऐसे में धार्मिक दृष्टि से यह महीना जल संरक्षण का संदेश भी देता है। सूर्य की ज्येष्ठता और ज्येष्ठ नक्षत्र की वजह से इस महीने को ज्येष्ठ कहा जाता है। इस महीने गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी भी होती है और समापन स्नान-दान पूर्णिमा से होता है।

शिव, सूर्य और वरुण देव की आराधना के लिए यह महीना खास होता है। इस महीने में व्रत व विशेष पूजा से जुड़ीं 12 पवित्र तिथियां हैं तो वहीं चार महापुरुषों की जयंतियां भी मनाई जाएंगी। इनमें महाराणा प्रताप और गुरु हरगोविंद की जयंती शामिल हैं।

पंडितों का कहना है कि इस माह में गर्मी अधिक होने से जलदान का सर्वाधिक महत्व है। प्याऊ लगवाना पुण्य कर्म माना जाता है। ज्योतिष की दृष्टि में चंद्रमा जल तत्व के रूप में माना गया है। इसलिए चंद्रमा की प्रसन्नता के लिए जल अपव्यय नहीं करना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पं. अजीत मिश्रा कहना है कि ज्येष्ठ में जल स्रोत सूखने लगते हैं। ऐसे मेंे जीवों के लिए सकोरे में जल भरने की परंपरा है। पक्षी या पशु विभिन्न देवी-देवताओं के वाहन हैं। इससे देवता भी प्रसन्न होते हैं।

ज्येष्ठ महीने में ये खास दिन...

मई (ज्येष्ठ)19 को गणेश चतुर्थी, 26 को अचला एकादशी, 27 को प्रदोष, 28 को शिव चतुर्दशी, 30 को वट सावित्री पूजा, शनि जयंती, सोमवती अमावस्या।

जून (ज्येष्ठ) 2 को रंभा तीज, 3 को विनायकी चतुर्दशी, 8 को महेश नवमी, 9 को गंगा दशहरा, 10 को निर्जला एकादशी, 12 को प्रदोष, 14 को पूर्णिमा।

जयंती-पुण्यतिथि

  • 22 मई, राजा राममोहन राय जयंती
  • 2 जून, वीर महाराणा प्रताप जयंती
  • 3 जून, गुरु अर्जुनदेव पुण्यतिथि
  • 9 जून, बिरसा मुंडा शहीद दिवस
  • 15 जून, गुरु हरगोविंद जयंती

खरीदी के लिए पुष्य योग 3 जून को 4:35 से 4 जून को शाम 6:25 तक। 30 जून को रात 11:50 से 1 जुलाई को रात 12:30 तक।

इनका दान श्रेष्ठ जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, सत्तू और फल।

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