निर्माणाधीन कचरा प्लांट, करोड़ों के उपकरण खा रहे जंग:कचरा निपटारे के लिए बनाया गया तालाबनुमा आकार का ढांचा कई जगहों पर पूरी तरह से बर्बाद

कोडरमा17 दिन पहले
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बने तालाब का धंसा हिस्सा। - Dainik Bhaskar
बने तालाब का धंसा हिस्सा।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत झुमरी तिलैयाव कोडरमा नगर निकाय क्षेत्रों में जमा होने वाले कूड़ा करकट के निस्तारण को लेकर चंद्रोडी में लगभग 10 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन कचरा प्लांट निर्माण कार्य पूरा होने के पूर्व ही घोटाले के भेंट चढ़ता दिख रहा है। एक तरफ जहां 3 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी कचरा प्लांट को चालू नहीं किया जा सका है।

वहीं इन 3 सालों में वहां कराए गए ढांचागत कार्यों के अलावा स्थापित किए गए करोड़ों के उपकरण पड़े पड़े बर्बाद की हालत में पहुंच चुके हैं। प्लांट परिसर के अंदर रोड निर्माण के अलावा कचरा के निस्तारण को लेकर बनाए गए तालाब नुमा आकार के ढांचा कई जगहों पर पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। वही कचरा निस्तारण को लेकर लाखों की लागत से खरीदे गए कंपैक्टर वाहन भी पड़े पड़े जंग खा रहे हैं।

कचरा प्लांट का मुआयना के दौरान पाया गया कि वहां बनाए गए सड़क कई जगहों पर पूरी तरह से टूट गए हैं ।वहीं कचरा को डंप करने व उन्हें विभिन्न श्रेणियों में विभक्त कर उपयोग में लाए जाने को लेकर बनाए गए तालाब के शक्ल में गड्ढे कई जगहों पर बरसात के दिनों में बह गए हैं।

उल्लेखनीय है कि उक्त कचरा प्लांट के निर्माण की स्वीकृति वर्ष 2017 में नगर विकास विभाग की ओर से दी गई थी । जिसे पीपीपी मोड पर केएमएसडब्ल्यूएम नमक एजेंसी के साथ एमओयू के तहत कराया जाना था। कुछ विवादों के कारण इसका निर्माण कार्य 2019 में शुरू किया गया जिसके तहत वहां ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर करोड़ों की लागत से कई तरह के मशीन लगाए गए थे। वही वहां जमा होने वाले कचरा के डिस्पोजल एवं उन्हें विभिन्न कार्यों में उपयोग को लाने को लेकर वहां बड़े आकार में तालाब की संरचना में गड्ढे का निर्माण कराया गया था।

इसके अलावा प्लांट के चारों ओर सड़क भी बनाई गई थी। जानकारी के अनुसार प्लांट में प्रतिदिन 52 मीट्रिक टन कचरा का प्रोसेसिंग कार्य किया जाना था। प्रोसेसिंग के तहत वहां जमा होने वाले कचराें से प्रतिदिन 9.5 मीट्रिक टन कंपोस्ट एवं आरडीएफ निर्माण किया जाना था। इसके अलावा प्लांट में प्रतिदिन 2000 पेवर ब्लॉक का भी निर्माण करने को लेकर उपकरण लगाए गए हैं।

पिछले साल नवंबर में प्लांट संचालन शुरू हाेना था, 9 महीने के बाद नहीं शुरू हुआ

प्लांट का संचालन पिछले साल 15 नवंबर को किया जाना था। मगर वर्तमान में निर्धारित डेटलाइन के 9 महीना बीतने के बाद भी इसे चालू नहीं किया जा सका है। वही वहां अब तक प्लांट के निर्माण को लेकर किए गए सभी कार्य एक तरफ से घोटाले की भेंट चढ़ता दिख रहा है। प्लांट के निर्माण को लेकर लगभग 6 करोड़ रुपए की राशि नगर विकास की ओर से खर्च की जा चुकी है।

पीपीपी मोड के तहत प्लांट के निर्माण के कार्य में 67 प्रतिशत का अंशदान नगर विकास का एवं 33% का योगदान केएमएसडब्ल्यूएम का है। नगर परिषद के सिटी मैनेजर प्रशांत भारती ने बताया कि फिलहाल ईसी की प्रत्याशा में अब तक प्लांट को चालू नहीं किया जा सका है ईसी मिलने में फिलहाल दो-तीन महीने का समय लगने का उम्मीद है।

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