बालिका आदिवासी छात्रावास का निरीक्षण किया:बालिका आदिवासी छात्रावास को जल्द कराया जाएगा शुरू : बीडीओ

बरवाडीह2 महीने पहले
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छात्रावास को शुरू कराने को लेकर जानकारी लेते बीडीओ राकेश सहाय। - Dainik Bhaskar
छात्रावास को शुरू कराने को लेकर जानकारी लेते बीडीओ राकेश सहाय।

दैनिक भास्कर में शुक्रवार को 23 लाख से बनाया भवन, जीर्णोद्धार पर खर्च किया 13 लाख... पर छात्रावास शुरू नहीं, नामक शीर्षक से खबर छपने के बाद जिला व प्रखंड प्रशासन हरकत में आ गया है। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर शनिवार को बीडीओ राकेश सहाय ने कल्याण विभाग की राशि से निर्मित बालिका आदिवासी छात्रावास का निरीक्षण किया।

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका नुसरत अंजुम से भवन के बारे में जानकारी ली। प्रभारी प्रधानाध्यापिका द्वारा बताया गया कि भवन पूर्व के प्रभारी प्रधानाध्यापक को सौंपा गया था, लेकिन भवन को सौंपने संबंधी किसी भी तरह का दस्तावेज है और न ही भवन से जुड़ी चाभी विद्यालय के पास है।

इसके बाद बीडीओ ने छात्रावास का निरीक्षण किया। मौके पर ही छात्रावास की भौतिक स्थिति से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया। बीडीओ सहाय ने कहा कि छात्रावास को जल्द से जल्द शुरू कराने का निर्देश वरीय अधिकारियों के द्वारा प्राप्त हुआ है। पूरे परिसर की साफ-सफाई करवाने के बाद कल्याण विभाग के माध्यम से छात्रावास के लिए बेडिंग और मेस का प्रबंध कराने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। आने वाले कुछ दिनों में इस छात्रावास का लाभ प्रखंड क्षेत्र की आदिवासी छात्राओं को देने का प्रयास किया जाएगा।

गौरतलब है कि प्रखंड मुख्यालय के परियोजना बालिका उच्च विद्यालय के समीप मनिका के पूर्व विधायक और झारखंड राज्य के पहले वन एवं पर्यावरण मंत्री स्व. यमुना सिंह की पहल पर कल्याण विभाग की राशि से यहां आदिवासी छात्रावास का निर्माण कराया गया था। इसके निर्माण में करीब 23 लाख रुपए खर्च किए गए थे। बिना उद्घाटन के ही यह भवन जर्जर हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में मुख्यमंत्री जन संवाद में की गई शिकायत बाद जीर्णोद्धार के नाम पर बड़े तामझाम से जिले के अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में करीब 13 लाख रुपए खर्च कर छात्रावास भवन की मरम्मत करवाई एवं चहारदीवारी निर्माण के नाम पर करीब दस लाख रुपए खर्च किए गए।

लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद इस छात्रावास को शुरू कराने की पहल न तो कल्याण विभाग के द्वारा और न ही जिले के किसी अधिकारी ने पहल की। जिसके कारण यह छात्रावास फिर से खंडहर में तब्दील होने लगा था। छात्रावास शुरू नहीं होने से प्रखंड क्षेत्र की आदिवासी छात्राएं किराए के मकान में रहने को मजबूर थी। दैनिक भास्कर में प्रमुखता से खबर छपने के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए।

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