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नक्सली गढ़ अब मुक्त:3 दशक बाद बूढ़ा पहाड़ खाली, डीजीपी ने हौसला बढ़ाया, डीजीपी ने स्थानीय ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, कहा- डरें नहीं, पूरी सुरक्षा दी जाएगी

लातेहार19 दिन पहले
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ग्रामीणों को सामान देते डीजीपी नीरज सिन्हा। - Dainik Bhaskar
ग्रामीणों को सामान देते डीजीपी नीरज सिन्हा।

तीन दशक से नक्सलियों की शरणस्थली रहा बूढ़ा पहाड़ अब नक्सलियों से मुक्त हो गया है। पुलिस अब यहां कैंप भी स्थापित कर दिया गया है। कैंप स्थापित होने के बाद रविवार को झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा हेलीकॉप्टर से बूढ़ा पहाड़ पहुंचे और जवानों के हौसला अफजाई किया। उन्होंने स्थापित कैंप का निरीक्षण कर जांबाज जवानों को पुरस्कृत कर हौसला बढ़ाया।

साथ ही स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर उनकी समस्याओं को सुना और निराकरण करने का आश्वासन दिया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि आप लोग नक्सलियों के भय से मुक्त हो गए हैं। सुरक्षा बलों के द्वारा पूरा सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों के बीच रोजमर्रा की वस्तुओं का वितरण किया। गांव में सड़क, बिजली, पानी की सुविधा देने की बात कही। सुरक्षा बलों की दिलेरी को देखने हुए महानिदेशक ने कहा कि राज्य में उग्रवादियों के लिए कोई जगह नहीं है और उन पर चौतरफा प्रहार जारी रहेगा।

सुरक्षा बलों के मनोबल और इच्छाशक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिकूल मौसम भारी बारिश और आंधी तूफान के बावजूद अभियान जारी रहा है। मौके पर एडीजी अभियान संजय आनंद लाटकर, पुलिस महानिरीक्षक सीआरपीएफ अमित कुमार , पुलिस महानिरीक्षक अभियान अमोल वी होमकर, पुलिस अधीक्षक शिवानी तिवारी के साथ बैठक कर बूढ़ा पहाड़ छोड़ भागे माओवादी के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर रणनीति बनाई। उन्होंने बताया कि झारखंड,छत्तीसगढ़ माओवादी नेताओं का सुरक्षित माना जाता है। यहां पोलित ब्यूरो, सेंट्रल कमेटी के सदस्य रणनीति बनाकर घटना को अंजाम देते थे।

मालूम हो कि पिछले तीन दशक से बूढ़ा पहाड़ में माओवादियों का शरणस्थली रहा है और यहीं से बड़े-बड़े घटना को अंजाम देने का कार्य करता रहा है। कई वर्षों से चलाए जा रहे अभियान के बाद सुरक्षाबलों को सफ़लता मिलता दिख रहा है। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। फिर भी अभियान थमी नहीं। पहाड़ तक पहुंचने वाले हर रास्ते पर नक्सलियों द्वारा आईडी बम बिछा रखा था। लेकिन पिछले एक वर्ष से रणनीति पूर्वक सुरक्षाबलों द्वारा संयुक्त अभियान चलाया गया। इसमें मूल रूप से ऑपरेशन ऑक्टोपस कारगर साबित हुई। े अथक प्रयास के बाद नक्सलियों के कब्जे में रहे बूढ़ा पहाड़ को मुक्त करा लिया गया है।

सूझबूझ के साथ चलाया अभियान, मिली सफलता

संयुक्त अभियान कोबरा, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ के साथ लातेहार व गढ़वा पुलिस ने सूझबूझ के साथ अभियान चलाई और पुलिस को सफलता मिली। पुलिस पहले पहाड़ के निचले हिस्से में रणनीति के तहत पहले धीरे-धीरे कैंप स्थापित किया। ऑपरेशन ऑक्टोपस के दौरान चार-पांच सितंबर को नक्सलियों से मुक्त कराकर बूढ़ा पहाड़ में पुलिस ने कब्जा कर लिया था। तब अलग-अलग तरह के 106 लैंडमाइंस के अलावा गोली की जखीरा के साथ भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। सुरक्षाबलों का आक्रमण रुख देख नक्सली इलाके से भाग खड़े हुए। उन्हें दबोचने के लिए सुरक्षा बलों का अभियान जारी है।

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