इस जज्बे को सलाम:4 माह के आरव की जान बचाने के लिए धनबाद के लोगों ने जुटाए 25 लाख, 3 माह बाद लिवर ट्रांसप्लांट करा लौटा मासूम

धनबाद2 महीने पहले
इलाज के बाद सकुशल लौटा मासूम।

लिवर की बीमारी से परेशान चार माह के मासूम बच्चे आरव की जान बच गई। इस बच्चे के इलाज के लिए लिवर ट्रांसप्लांट कराने की आवश्यकता था। इसमें करीब 25 लाख रुपये का खर्च आ रहा था। सरकारी मदद के बावजूद यह राशि पूरी नहीं हो पा रही थी। धनबाद के लोगों ने सामूहिक रूप से परिवार की आर्थिक मदद की। इससे यह राशि महज 40 दिन के अंदर एकत्र हो गई।बुधवार की सुबह बच्चा लिवर ट्रांसप्लांट कराने के बाद अपनी मां के साथ वेल्लोर से सकुशल धनबाद वापस लौट आया। बच्चे का इलाज करीब तीन महीने तक चला। धनबाद रेलवे स्टेशन पहुंचने पर शहर के लोगों ने बच्चे का स्वागत फूल माला पहनाकर तथा आरती उतार कर किया। यह परिवार धनसार थाना क्षेत्र का रहने वाला है। बच्चे की मां का नाम रानी देवी है। पिता का नाम अजय कुमार है। वह शादी-विवाह और जन्मदिन के समारोह में चाट बनाने का काम करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण यह परिवार अपने बच्चे का इलाज नहीं करा पा रहा था। चिकित्सकों ने बच्चे का लिवर ट्रांसप्लांट करने की जरूरत बताई थी।धनबाद की जनता के मदद के बाद परिवार को बच्चे के इलाज के लिए करीब 25 लाख रुपए की राशि मिल गई। समाजसेवी और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से इस परिवार की खुशियां कायम रह सकीं। मां रानी ने इसका पूरा श्रेय धनबाद के लोगों को दिया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।

कुछ ऐसा था पूरा मामला
मामला अगस्त 2021 का है। एक तरफ देश- दुनिया में कोरोना से तबाही मची हुई थी। इसी बीच धनबाद में एक माता-पिता अपने चार माह के नवजात की लिवर की बीमारी से परेशान थे। वह अपने जिगर के टुकड़े का इलाज कराने में असमर्थ थे। डाक्टरों ने 40 दिन के अंदर 25 लाख रुपए की व्यवस्था करने के लिए कहा था। ऑपरेशन के पंद्रह दिन बचे थे। परिवार किसी तरह 13 लाख रुपए की व्यवस्था कर सका। पांच लाख रुपए स्वास्थ्य विभाग की ओर से असाध्य रोग निधि के तहत दिया गया। तीन लाख रुपए प्रधानमंत्री राहत कोष से देने की बात हुई। ढाई लाख रुपए आम लोगों ने दिए।

इसके बाद भी राशि पूरी नहीं हो रही थी। बच्चे का इलाज रांची के रिम्स में चल रहा था। इसके बाद बच्चे की जान बचाने के लिए शहर के सभी लोगों ने मिलकर अभियान चलाया। देखते ही देखते पंद्रह दिनों में राशि एकत्र हो गई। बच्चा इलाज के लिए वेल्लोर चला गया। धनबाद के लोगों के इस परोपकार के जज्बे को अब दूसरे शहरों के लोग सलाम कर रहे हैं।

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