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कोरोनाकाल जॉब संकट:झारखंड के नियोजनालयों में 18 माह में 638% बढ़े आवेदन, 5.55 लाख लाेगों को नौकरी की तलाश

रांची3 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • राज्य के 24 जिलों के 43 इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज में कोराेना के दौरान बढ़े नौकरी के आवेदन
  • अफसर बोले- कोरोना के कारण रोजगार कैंप नहीं लगे, जॉब देने के लिए कंपनियां भी नहीं आईं
  • 2020 में ढेरों आवेदन, पर 2021 में दूसरी लहर की तीव्रता के चलते घटी संख्या, नौकरियां किसी को नहीं

कोरोना से पहले झारखंड के नियाेजनालयों (एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज) में 2019 में 75,170 लोगों ने रोजगार पाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। पर, कोरोनाकाल के दौरान नाैकरी पाने के लिए नियोजनालयों में नौकरी चाहने वालों की फौज खड़ी हो गई है। इन 18 महीनों यानी जनवरी 2020 से जून 2021 तक 5,55,030 लोगों ने राज्य के नियाेजनालयों में नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें 3,69,505 पुरुष हैं तो 1,85,525 महिलाएं।

2019 के मुकाबले जनवरी 2020 से जून 2021 तक झारखंड के नियोजनालयों में नौकरी के लिए आवेदनों की संख्या 638% बढ़ गई है। 2020 में 5,36,323 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था तो 2021 में जून तक 18,707 रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इनमें सर्वाधिक 32.33% स्नातक हैं और करीब 31.33% 12वीं पास। झारखंड में फरवरी से ही नियोजनालयों में हलचल थी। पहली लहर (जून-सितंबर 2020) में 67,511 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि दूसरी लहर (फरवरी-मई 2021) में 18,707 ने। अवर प्रादेशिक नियोजनालय धनबाद के सहायक निदेशक एके सिंह कहते हैं कि कोरोना के कारण रोजगार कैंप नहीं लगे और नौकरी देने के लिए कंपनियां भी नहीं आईं।

एक्सपर्ट बोले-लाेगों ने विभिन्न तरह की आय के साधन तो खोज निकाले पर स्थायी नौकरियां नहीं मिल रहीं

सेंटर फॉर माॅनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार मई की तुलना में राज्य में जून में 3.2% बेरोजगारी दर कम हो गई। जबकि जून-20 से जून-21 तक में यह 8.1% कम हुई। यानी लोगों ने विभिन्न तरह के कामकाज से आय के साधन तो खोज निकाले पर स्थायित्व वाली नौकरियां नहीं मिलीं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियोजनालयों में बढ़े आवेदन इसका प्रत्यक्ष सबूत हैं। हालांकि, सीएमआईई की बेराजगारी दर सैंपल सर्वे पर आधारित होती है। मई में सीएमआईई के सीईओ महेश व्यास ने भी माना था कि दूसरी लहर में देश के एक करोड़ से अधिक लोगों की नौकरी गई। दूसरी ओर, पिछले साल से अब तक सर्वे में शामिल 97% परिवारों की आय घट गई। पहली लहर में सीएमआईई के अनुसार राज्य में बेरोजगारी दर 11.9% रही, जबकि नियोजनालयों में कुल रजिस्ट्रेशन का 12.58% लोग इसी दौरान रजिस्टर हुए। दूसरी लहर में ये दर 14% रही, जबकि 24% रजिस्ट्रेशन हुआ।

जॉब रजिस्ट्रेशन के दो बड़े कारण

1. कंपनियों में छंटनी के चलते बढ़ी बेरोजगारी, मार्केट में जाॅब न होने के चलते युवाओं को सरकार से आस

2.झारखंड सरकार ने बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की है। सीएम प्रोत्साहन योजना का लाभ भी यहां से मिलेगा, इसलिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या बढ़ रही।

लोगों के पास आवश्यक योग्यता, पर उन्हें स्थायी काम ही नहीं मिल रहा

अर्थशास्त्री डॉ रमेश शरण ने बताया कि बेरोजगारी मापने का सबसे बड़ा इंडेक्स नियोजनालय यानी इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज हैं। इसे खुली बेरोजगारी भी कहते हैं, क्योंकि उस व्यक्ति में आवश्यक योग्यता है, पर काम नहीं मिल रहा। सीएमआईई के आंकड़े सैंपल के आधार पर होते हंै। उसके अपने मैथड हैं, पर नियोजनालयों में बढ़ी भीड़ क्लीयर कट बताती है कि राज्य में बेरोजगारी बढ़ी है। प्रत्यक्ष दिख भी रहा है कि जिनकी नौकरी गई है, उन्हें रोजगार और आमदनी का कोई स्थायी व नया जरिया नहीं मिल रहा है।

सर्वे से समझें

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ने हाल में झारखंड, बिहार, यूपी के 4763 लोगों से रोजगार के संबंध में रायशुमारी की। इसमें पता चला कि पहले लॉकडाउन के दौरान नौकरी गंवाने वाले 40% लोगों के पास 10 महीने बाद भी आमदनी का कोई जरिया नहीं है।

डॉ. रमेश शरण, अर्थशास्त्री

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