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बिल पर बवाल:बाबूलाल मरांडी ने कहा- भू-माफिया, लुटेरों के लिए सरकारी संरक्षण में लाया गया है झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल

रांची17 दिन पहले
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पूर्व सीएम ने कहा कि इस प्रकार की गड़बड़ी को लेकर हमने पूर्व में ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। सरकार ने कार्रवाई की बात तो दूर, यह बिल लाकर यह साबित कर दिया कि झारखंड सरकार की मंशा क्या है ?
  • पूर्व सीएम ने कहा- झारखंड सरकार अविलंब इस एक्ट को रद्द करे, नहीं तो सड़क से सदन तक भाजपा करेगी विरोध
  • हेमंत सोरेन कैबिनेट ने आठ सितंबर को कैबिनेट की बैठक में झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल-2020 को पारित कराया है

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल को लेकर कहा है कि झारखंड सरकार ने चुपके-चुपके इस विधेयक को कैबिनेट से पारित कराया है। सूचना है कि मानसून-सत्र के दौरान विधानसभा से इसे पारित कराने की कोशिश होगी। प्रदेश के भू-माफिया, लुटेरों के लिए सरकारी संरक्षण में इस एक्ट को लाया गया है। यह एक काला कानून है। बाबूलाल मरांडी रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल में जिस प्रकार का प्रावधान किया गया है, उसके अनुसार जमीन से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की गड़बड़ी करने पर भ्रष्ट अफसरों पर सिविल या क्रिमिनल का कोई मामला नहीं बनेगा। इस प्रकार झारखंड सरकार प्रदेश में जमीन की लूट की खुली छूट देना चाहती है। पूरे प्रदेश में जमीन के ट्रांसफर में भारी गड़बड़ी की शिकायतें आए दिन देखने को मिलती रहती है। जीएम लैंड की जमीन में गड़बड़ी तो हो ही रही है, चल रहे सरकारी दफ्तर की जमीन को भी माफिया बेच रहे हैं। पूरे प्रदेश में पदाधिकारियों और सरकार के संरक्षण में यह खेल बदस्तूर जारी है।

पूर्व सीएम ने कहा कि इस प्रकार की गड़बड़ी को लेकर हमने पूर्व में ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। सरकार ने कार्रवाई की बात तो दूर, यह बिल लाकर यह साबित कर दिया कि झारखंड सरकार की मंशा क्या है ? कानून तो यह बनना चाहिए कि किसी प्रकार की गड़बड़ी करने पर दोषी पदाधिकारी को जेल तो जाना ही होगा, नौकरी से भी हाथ धोनी पड़ सकती है। परंतु सरकार ने उल्टा उनकी गलतियों पर पर्दा डालने और उनके बचाव के लिए कानून बनाकर साबित कर दिया कि गरीबों के हित से इस सरकार को कोई सरोकार नहीं है। अगर यह कानून पारित हो गया तो झारखंड की गरीब जनता अपनी जमीन से हाथ धो बैठेगी। हमारी मांग है कि इस एक्ट को झारखंड सरकार अविलंब रद्द करे, वापस ले। अगर झारखंड सरकार ऐसा नहीं करती है तो हमारी पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इसका पुरजोर विरोध करेगी।

कैबिनेट के फैसले के खिलाफ बंधु ने खोला मोर्चा, कहा- राज्य के लिए काला अध्याय साबित होगा लैंड म्यूटेशन एक्ट 2020
विधायक बंधु तिर्की ने कैबिनेट में मंजूर बिल झारखंड लैंड म्यूटेशन एक्ट 2020 के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कहा है कि रघुवर सरकार द्वारा तैयार बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यदि मानसून सत्र में इसे पेश किया गया तो इस राज्य के लिए यह बिल काला अध्याय साबित होगा। झारखंड के आदिवासी, दलित व पिछड़े जमीन से बेदखल हो जाएंगे।

आठ सितंबर को कैबिनेट ने लैंड म्यूटेशन बिल-2020 को दी है मंजूरी
हेमंत कैबिनेट ने आठ सितंबर को लैंड म्यूटेशन विधेयक-2020 के प्रारूप को मंजूरी दी है। विधानसभा से पारित होने के बाद ऑनलाइन म्यूटेशन की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता मिल जाएगी। म्यूटेशन की प्रक्रिया भी सरल होगी। इससे जुड़े राजस्व कर्मचारी से लेकर अंचल अधिकारी और इससे ऊपर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो जाएगी। अवैध और दोहरी जमाबंदी की प्रक्रिया भी सरल होगी। अपर समाहर्ता अवैध और दोहरी जमाबंदी रद्द कर सकेंगे। पहले यह अधिकार एलआरडीसी को था। अब डीसी के यहां अपील और कमिश्नर के यहां रिवीजन पीटिशन दायर किया जा सकेगा।

विधेयक में कहा गया है कि झारखंड में म्यूटेशन की प्रक्रिया बिहार टेनेंट होल्डिंग (मेंटेनेंस ऑफ रिकार्ड्स) एक्ट 1973 के तहत की जाती है। लेकिन इस एक्ट में ऑनलाइन म्युटेशन का जिक्र नहीं है, जिससे म्युटेशन पर वैधानिक सवाल खड़ा होता है। सुभद्रा देवी बनाम झारखंड सरकार के मामले में हाईकोर्ट में वादी द्वारा यह सवाल भी खड़ा किया गया। उसके बाद महाधिवक्ता की राय पर राज्य सरकार ने बिहार लैंड म्युटेशन एक्ट 2011 की तर्ज पर झारखंड लैंड म्युटेशन एक्ट 2020 का गठन किया है।

क्या है एक्ट में प्रावधान
कोई भी रैयत सीओ के यहां ऑनलाइन आवेदन करेगा। इस संबंध में विभाग द्वारा राजस्व कर्मचारी से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों के कार्य निष्पादन की समय सीमा तय की जा चुकी है। अगर वे तय समय सीमा में म्युटेशन से जुड़े कार्य निष्पादित नहीं करते तो उन्हें उसका कारण बताना होगा। अगर कारण सही नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारी दंडित किये जा सकेंगे। इसी तरह जमाबंदी को रद्द करने का पहले अधिकार एलआरडीसी को दिया गया था। साथ ही फोर-एच में यह प्रक्रिया बहुत दुरूह थी। अब दोहरी या गलत जमाबंदी रद्द करने का अधिकार एसी को दिया गया है। पहले रिविजन और अपील के लिए सरकार के पास जाना पड़ता था। अब डीसी के यहां अपील और कमिश्नर के यहां रिविजन पिटिशन दायर किया जा सकेगा।

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